बिहार से बीजेपी के एक और नेता अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। ये हैं अररिया से बीजेपी सांसद प्रदीप कुमार सिंह। बीजेपी सांसद प्रदीप सिंह (Pradeep Singh) ने पिछले दिनों एक ऐसा बयान दिया जो मुस्लिम समाज को नागवार गुजरा।
बीजेपी सांसद के बयान से गुस्साए लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। अररिया के हर चौक चौराहे पर जमकर बवाल हुआ। बवाल बढ़ता देख सांसद महोदय को समझ आ गया कि उनके बयान के चक्कर में फायदा से ज्यादा नुकसान हो सकता है।
फिर क्या था, नेताजी ने यू-टर्न ले लिया। प्रदीप सिंह ने वही घिसा पिटा ट्रिक आजमाया, जो हमारे देश के नेता अक्सर डैमेज कंट्रोल के लिए करते हैं। अब तो आप समझ ही गए होंगे कि बीजेपी सांसद ने क्या ट्रिक अपनाया होगा।
चलिए बता देते हैं..बीजेपी सांसद अब कह रहे हैं कि उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। यही नहीं, इसका पूरा ठीकरा विपक्ष के सिर पर फोड़ते हुए यहाँ तक कह दिया कि कुछ उपद्रवी तत्व अररिया के माहौल को खराब करना चाहते हैं।
लेकिन वो कहावत है न… “तीर कमान से और बात जुबान से निकल जाने के बाद वापस नहीं आते।” अररिया सांसद महोदय के केस में तो अब ऐसा ही होता दिख रहा है।
अब इस पूरे बवाल की जड़ को समझने की कोशिश करते हैं। दरअसल, केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह ने हिन्दू स्वाभिमान यात्रा निकाली। दावा किया गया कि इस यात्रा का मकसद हिंदुओं को एकजुट करना, उनके स्वाभिमान को जगाना है। खैर पब्लिक भी अच्छे से जानती है कि ये यात्रा किस मकसद से निकाली गई।
गिरिराज सिंह ने इस यात्रा के लिए बिहार के सीमांचल के इलाके को चुना। इस इलाके में भागलपुर, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और अररिया जिले आते हैं। इन जिलों में मुस्लिम समुदाय की अच्छी खासी आबादी रहती है।
गिरिराज सिंह ने हिन्दू स्वाभिमान यात्रा शुरू की तो ‘लव जिहाद, थूक जिहाद और लैंड जिहाद’ की बात की। फिर ‘रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठ’ का मुद्दा उठाया।
गिरिराज सिंह की इस यात्रा में अररिया से बीजेपी सांसद प्रदीप कुमार सिंह शामिल हुए। दोनों ही नेता आरएसएस की पृष्ठभूमि वाले। तो प्रदीप सिंह भी अब कहाँ पीछे रहने वाले थे, उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि – “अररिया में रहना है, तो हिंदू बनना होगा।”
बस क्या था, बीजेपी सांसद के इस बयान पर हंगामा शुरू हो गया। बवाल बढ़ता देख सांसद महोदय ने विक्टिम कार्ड खेलना शुरू कर दिया। यहाँ तक दावा कर दिया कि उनको दुबई और सऊदी अरब से धमकी मिल रही है। लेकिन विपक्ष भी इस मुद्दे को ऐसे ही हाथ से जाने देना नहीं चाहता था।
सूबे में अगले साल चुनाव होने वाले हैं। आरजेडी से लेकर कांग्रेस और AIMIM ने सांसद महोदय के बयान पर कड़ा ऐतराज जताया। लालू यादव ने तो यहाँ तक कह दिया कि, “ई लोग हिंदू नहीं है …सब पाखंडी है, खाली पाखंड करता है.”
सियासी वार पलटवार तो अपनी जगह है लेकिन बीते कुछ दिनों में जो कुछ हुआ, चाहे वो गिरिराज सिंह हों या अररिया सांसद प्रदीप सिंह… एक चीज साफ होने लगी कि बीजेपी के चंद नेताओं ने हिन्दू वोटों के ध्रुवीकरण का खेल शुरू कर दिया है, बिहार में चुनाव में भले ही अभी वक़्त हो।
हैरानी होती है कि कोई केंद्रीय मंत्री किसी धर्म के नाम पर यात्रा कैसे निकाल सकता है? बिहार में शायद ऐसा पहली बार हो रहा है। सवाल ये भी है कि संवैधानिक पद पर बैठा एक आदमी धर्म विशेष की राजनीति कैसे कर सकता है?
प्रदीप सिंह की बात करें तो कोई सांसद अपने इलाके के सभी वर्गों, जातियों, धर्मों के लोगों का जन प्रतिनिधि होता है, किसी धर्म, जाति, वर्ग विशेष के लोगों का नहीं।
दो बार विधायक रहे और तीसरी बार सांसद बने प्रदीप सिंह को यह नहीं भूलना चाहिए कि उन्होंने हर बार शपथ लेते समय संविधान की कसम खाई है जिसकी बुनियाद धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक समरसता है।
ऐसा नहीं लगता कि गिरिराज सिंह और प्रदीप सिंह जैसे कुछ नेता समाज को बांटने का काम कर रहे हैं और अपनी सियासी रोटियाँ सेंक रहे हैं? बीजेपी ने भले ही हिन्दू स्वाभिमान यात्रा से अपना पल्ला झाड़ लिया लेकिन क्या केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बगैर ये सब संभव है?


