Bihar ByPoll: बिहार की चार विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव का नतीजा सामने आ गया है। सभी चार सीटों पर एनडीए गठबंधन ने जीत दर्ज की है।
बिहार की चारों विधानसभा सीट इमामगंज, बेलागंज, तरारी और रामगढ़ पर NDA गठबंधन ने जीत दर्ज की है। बिहार विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में महागठबंधन काे करारी हार का सामना करना पड़ा है। बिहार में हुए उपचुनाव में राजद का सूपड़ा साफ हो गया है। वहीं, उपचुनाव से बिहार की राजनीति में डेब्यू करने वाले प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज अपना खाता भी नहीं खोल सकी है। प्रशांत किशोर की पार्टी चार में से तीन विधानसभा सीटों पर तीसरे नंबर पर रही।
जानिए चारों विधानसभा सीट का हाल
बेलागंज विधानसभा सीट चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक बेलागंज में जदयू की मनोरमा देवी ने राजद के विश्वनाथ कुमार सिंह को 21,391 मतों हराया। जदयू ने इस जीत के साथ राजद का तीन दशक पुराना गढ़ ढहा दिया है। तीसरे स्थान पर जन सुराज पार्टी के मोहम्मद अजमद रहें। जिन्हें 17 हजार 285 वोट मिला।
तरारी विधानसभा सीट पर बीजेपी ने पहली बार जीत दर्ज की है। बाहुबली नेता सुनील पांडेय के बेटे विशाल प्रशांत ने सीपीआई माले के राजू यादव को 10,612 मतों से हराया। जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार किरण सिंह 5,622 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
इमामगंज विधानसभा सीट में भी केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी ने अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाते हुए राजद के रोशन मांझी को 5,945 मतों से हराया। यहां जन सुराज के उम्मीदवार जितेंद्र पासवान को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा। पासवान को 37,103 वोट मिले।
रामगढ़ विधानसभा सीट पर बीजेपी और बहुजन समाज पार्टी के बीच में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। बीजेपी के अशोक सिंह ने बसपा के सतीश उर्फ पिंटू यादव को कड़े मुकाबले में 1,362 वोट से हराया। यहां राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे एवं सांसद सुधाकर सिंह के भाई अजीत सिंह तीसरे नंबर पर रहे। अपनी हार को देखते हुए मतगणना हॉल से वे बीच में ही निकल गए। मीडिया से बात करते हुए अजीत सिंह ने मतगणना के दौरान ही अपनी हार स्वीकार कर ली।
आपको बता दें कि बिहार की चार सीटों तरारी, बेलागंज, इमामगंज और रामगढ़ के मतदाताओं ने 13 नवंबर को अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। इस उपचुनाव को बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है। दोनों ही गठबंधन के लिए यह उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ था। इस उप चुनाव में 38 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत को आजमाया था।


