सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देशभर में बुलडोज़र (Bulldozer) एक्शन पर रोक जारी रहेगी। अदालत ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।
बुलडोज़र (Bulldozer) ऐक्शन पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस विश्वनाथन की बेंच ने मामले की सुनवाई की।
बुलडोज़र ऐक्शन पर अदालत ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है।
बेंच ने कहा कि कोर्ट के आदेश की अवमानना करने वालों पर एक्शन होगा। साथ ही पीड़ितों की संपत्ति वापस की जाएगी, जिसका मुआवजा भी दोषी अधिकारियों से वसूला जाएगा।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और राजस्थान सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि एक समुदाय विशेष के खिलाफ बुलडोजर एक्शन किए जाने के आरोप लगे हैं।
इस पर जस्टिस गवई ने कहा कि हम एक धर्मनिरपेक्ष देश हैं। हम जो भी निर्धारित कर रहे हैं वह पूरे देश के लिए होगा। चाहे वह मंदिर हो या दरगाह, उसे हटाना ही सही होगा, क्योंकि सार्वजनिक सुरक्षा सबसे पहले है।
बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुलडोजर (Bulldozer) एक्शन को लेकर सख्त कदम उठाया था। देश की सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे देश में बुलडोजर एक्शन पर 1 अक्टूबर तक रोक लगाने का फरमान सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने ये साफ किया था कि ये रोक सार्वजनिक रास्तों, रेलवे ट्रैक और फुटपाथ पर अवैध निर्माण के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर लागू नहीं होगा।
इससे पहले 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुलडोजर एक्शन पर सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि कानून की नजर में अगर कोई इंसान दोषी हो, तो भी उसके घर को नहीं गिराया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी बुलडोजर (Bulldozer) न्याय के खिलाफ दायर याचिका पर की थी। ये याचिका जमीयत-उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulema-e-Hind) की ओर से दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बीजेपी (BJP) शासित राज्यों में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है और बुलडोजर एक्शन लिया जा रहा है।


