Jharkhand के सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने गुरुवार को रांची के प्रभात तारा मैदान में एक बड़े कार्यक्रम के दौरान राज्य के किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
इस अवसर पर सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने झारखंड कृषि ऋण माफी योजना के तहत लगभग 1.77 लाख किसानों का 400 करोड़ रुपये तक का कर्ज माफ किया। इसके साथ ही, उन्होंने किसानों के लिए ‘बिरसा किसान इंटीग्रेटेड पोर्टल’ नामक एक विशेष पोर्टल भी लॉन्च किया। इस कार्यक्रम में डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग और एनडीडीबी के बीच एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए।
इस कार्यक्रम में सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने कहा कि यह केवल ऋण माफी योजना नहीं है, बल्कि किसानों के सम्मान में एक शुरुआत है। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने किसानों को खेती-बाड़ी में आ रही आर्थिक समस्याओं से उबारने और उन्हें एक नई शुरुआत का अवसर देने के लिए 2 लाख रुपये तक का कृषि ऋण माफ करने का निर्णय लिया है।
इस अवसर पर सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की उपस्थिति में डेयरी उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए कृषि विभाग के सचिव अबु बकर सिद्दीक और एनडीडीबी, आनंद, गुजरात के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एस रघुपति के बीच 5 साल के लिए एक समझौता हुआ।
इस समझौते के तहत लगभग 68 हजार दुग्ध उत्पादकों को जोड़ा जाएगा। साथ ही, दुग्ध उत्पादकों को दूध के उचित मूल्य के अलावा 5 रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। इसी दौरान सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने इस कार्यक्रम में भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।
सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने कहा कि पूरे देश के किसानों ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार के खिलाफ एक साल से अधिक समय तक दिल्ली में डटकर विरोध प्रदर्शन किया। किसान इतने मजबूती से डटे रहे कि केंद्र सरकार उस घेरे से बाहर नहीं निकल पाई।
इस आंदोलन में कई किसानों की जान भी चली गई, लेकिन वे अपने हक के लिए लड़ते रहे, क्योंकि एनडीए की भाजपा सरकार किसानों के खिलाफ काले कानून लेकर आ रही थी। देशभर के किसानों को व्यापारियों के हवाले करने की साजिश रची जा रही थी।
वैसे भी इन लोगों ने देश की अधिकांश संपत्ति पहले ही बेच दी है, और अब देश की रीढ़, यानी किसानों को भी बेचने की तैयारी थी। लेकिन किसानों ने हार नहीं मानी और ऐसा जबरदस्त आंदोलन किया कि आखिर में सरकार को झुकना पड़ा और तीनों काले कानून वापस लेने पड़े।
सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने आगे कहा कि, “हम किसानों को आत्मनिर्भर बना रहे हैं ताकि राज्य की जवानी खुशहाली की दिशा में आगे बढ़ सके. झारखंड की मिट्टी हर प्रकार की खेती के लिए अनुकूल है, और हम किसानों को वैकल्पिक कृषि से जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं.”


