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    क्या है Jharkhand का सियासी समीकरण ?

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    इस साल के अंत में झारखंड (Jharkhand) में विधानसभा का चुनाव होने वाला है। प्रदेश में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है।

    क्या झारखंड (Jharkhand) की जनता इस बार भी हेमंत सरकार को लगातार तीसरी बार चुनेगी या बीजेपी को मौका देगी? सत्ता पक्ष और विपक्ष की तरफ से मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन होगा? इस खबर में हम ऐसे ही तमाम सवालों, संभावनाओं और झारखंड का सियासी समीकरण पर बात करेंगे।

    चुनाव आयोग (ECI) की तरफ से झारखंड (Jharkhand) में विधानसभा चुनाव की घोषणा भले न हुई हो लेकिन सभी दलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार के हालात अलग हैं। इस चुनाव में बीजेपी, ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू), जनता दल (यूनाईटेड) और एनसीपी (अजित पवार गुट) NDA का हिस्सा हैं। वहीं I.N.D.I.A गठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, राजद और भाकपा माले एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं।

    हालांकि, अभी सीट बंटवारा किसी भी गठबंधन के लिए अग्निपरीक्षा होगी। लेकिन चुनावी माहौल में सबसे दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड (Jharkhand) के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, दोनों ही, खुद को ‘पीड़ित’ बताकर जनता की सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे हैं।

    JMM को मिल सकता है मंईयां सम्मान योजना का लाभ

    हेमंत सोरेन का कहना है कि बीजेपी ने उन्हें जानबूझकर पांच महीने जेल में रखा था। वहीं चंपई सोरेन का कहना है कि हेमंत सोरेन ने बिना बताए विधायक दल की मीटिंग बुला ली और उन्हें सीएम पद से हटाकर खुद सीएम बन गए। चुनाव से पहले सभी पार्टियां वोटर्स को लुभाने की कोशिश कर रही हैं।

    हाल ही हेमंत सोरेन सरकार ने मंईयां सम्मान योजना के तहत गरीब महिलाओं को 1000 रूपए देना शुरू किया है। सोरेन सरकार ने वादा किया है कि चुनाव के बाद मंईया सम्मान योजना को 1000 से बढ़ाकर 1200 कर दिया जाएगा। सोरेन सरकार ने मनरेगा मजदूरों के लिए भी सम्मान योजना की घोषणा की है। कृषि ऋण माफी योजना कार्यक्रम भी चल रही है। माना जा रहा है कि जनता के लिए चलाई गई इन योजनाओं का फायदा हेमंत सोरेन को चुनावों में मिल सकता है।

    कांग्रेस ने भी कर ली है तैयारी

    राज्य में आगामी चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने भी कमर कस ली है। पार्टी ने झारखंड (Jharkhand) चुनावों के लिए कैंपेन कमेटी का गठन कर दिया है, जिसका अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय को बनाया गया है।

    झारखंड (Jharkhand) में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने इलेक्शन कमेटी के साथ ही मैनिफेस्टो कमेटी और कैंपेन कमेटी का भी गठन किया है।

    इलेक्शन कमेटी का अध्यक्ष केशव कुमार महतो कमलेश को बनाया गया है, इनकी टीम में 31 सदस्य हैं। मेनिफेस्टो कमेटी के अध्यक्ष बंधु तिर्की हैं इसमें 25 सदस्य होंगे। इसके अलावा कैंपेन कमिटी में कुल 37 सदस्य होंगे।

    वहीं भाजपा भी वोटर्स को लुभाने की कोशिश कर रही हैं। प्रधानमंत्री से लेकर केंद्रीय मंत्री तक झारखंड (Jharkhand) में डेरा डाले हुए है। हाल ही में Jharkhand में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा कि अगर भाजपा की सरकार बनी तो लाडली बहनों को हर माह 2100 रुपया दिया जाएगा। ये भी कहा गया कि अगर भाजपा की सरकार बनती है तो कैबिनेट की पहली बैठक में ही 2 लाख 87 हजार रिक्त पदों को भरा जाएगा।

    हाल ही में पीएम मोदी जमशेदपुर पहुंचे थे, जहां पीएम ने 6 वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई थी। उसके बाद एक जनसभा की और कहा कि हेमंत सोरेन ने चंपई सोरेन के साथ धोखा किया है।

    कुल मिलाकर देखें तो अभी तो जेएमएम, बीजेपी, कांग्रेस और दूसरी तमाम पार्टियां अपने लिए चुनावी जमीन तैयार कर रही हैं। लेकिन बड़ा सवाल है कि क्या इस बार भी सत्ता पक्ष हेमंत सोरेन पर दांव लगाएगी या किसी गैर आदिवासी चेहरे को प्रोजेक्ट करेगी। क्योंकि कांग्रेस में सीएम के तौर पर गैर आदिवासी चेहरा प्रोजेक्ट करने के लिए सुबोध कांत सहाय प्रबल दावेदार हो सकते हैं।

    बात बीजेपी की करें तो यहां सीएम के लिए 3 बड़े दावेदार हैं जो आदिवासी चेहरा हैं, इनमें अर्जुन मुंडा, बाबू लाल मरांडी और चंपाई सोरेन शामिल हैं। बीजेपी में गैर-आदिवासी सीएम के कैंडिडेट की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पूर्व सीएम रघुवर दास को झारखंड से सटे राज्य ओडिशा का गवर्नर बनाना इस संभावना को बल देता है।

    वैसे तो अभी I.N.D.I.A की तरफ से हेमंत सोरेन प्रबल दावेदार हैं लेकिन अगर कांग्रेस को ज्यादा सीटें आई तो हालात कुछ और भी हो सकता हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसको मुख्यमंत्री पद पर बैठाती है।

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