कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (Siddaramaiah) को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) मामले में सिद्धारमैया की याचिका कर्नाटक हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है।
यह मामला तब शुरू हुआ जब राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने सिद्धारमैया (Siddaramaiah) के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी। राज्यपाल के इस फैसले को सीएम सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना की पीठ ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। खासतौर पर विपक्षी दल भाजपा ने इस मौके पर मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा है कि “सिद्धारमैया के पास अब इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।”
बीजेपी ने साधा निशाना
MUDA मामला सिद्धारमैया (Siddaramaiah) के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील है और अदालत के इस फैसले से मुख्यमंत्री की चुनौती और बढ़ गई है। इस फैसले से उनकी सरकार की स्थिरता पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं, क्योंकि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर उन पर लगातार इस्तीफे का दबाव बना रहा है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने 12 सितंबर को इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था। राज्यपाल ने 16 अगस्त को प्रदीप कुमार एस.पी., टी.जे. अब्राहम और स्नेहमयी कृष्णा की याचिकाओं में निम्नलिखित कथित अपराधों के आधार पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी। ये मंजूरी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218 के तहत दी गई थी।
सीएम सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने 19 अगस्त को राज्यपाल के आदेश की वैधता को चुनौती देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के आदेश को रद्द करने की मांग की। सीएम सिद्धारमैया (Siddaramaiah) ने कहा कि मंजूरी का आदेश बिना सोचे-समझे जारी किया गया है और यह वैधानिक नियमों का उल्लंघन करता है।
क्या है पूरा मामला?
सिद्धारमैया (Siddaramaiah) पर आरोप है कि उनकी पत्नी बीएम पार्वती को मैसूर के एक पॉश इलाके में MUDA द्वारा अधिगृहीत जमीन के बदले बेहद कीमती भूखंड आवंटित किया गया था। 3.16 एकड़ जमीन के बदले पार्वती को 50:50 योजना के तहत प्लॉट दिए गए थे, जहां MUDA ने आवासीय नक्शा विकसित किया था।
अगस्त में कांग्रेस मंत्रियों और विधायकों ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा सिद्धारमैया के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी के विरोध में ‘राजभवन चलो’ प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने राज्यपाल पर भेदभाव का आरोप लगाया, जबकि राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राज्य की मुख्य सचिव से मामले की विस्तृत रिपोर्ट की मांग की।


