आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक नरेश बाल्यान को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी हैं। जमानत मिलने के साथ ही दिल्ली पुलिस ने फिर नरेश बाल्यान को गिरफ्तार कर लिया।
इस बार दिल्ली पुलिस ने नरेश बाल्यान को मकोका केस में गिरफ्तार किया है। नरेश बाल्यान उत्तम नगर विधानसभा सीट से विधायक हैं।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने दी थी जमानत
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को नरेश बाल्यान को जबरन वसूली मामले में जमानत दे दी थी। कोर्ट ने उन्हें 50 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत दी थी। कोर्ट में पेशी के दौरान नरेश बाल्यान के वकील ने कोर्ट को बताया था कि अभियोजन पक्ष ने ऐसा कुछ भी नहीं पेश किया है। जिससे यह पता चले कि जमानत पर रिहा होने पर बाल्यान खतरा बन जाएंगे। वो पब्लिक सर्वेंट हैं। वो कहीं नहीं भाग सकते है। वकील ने बताया कि वो खुद रंगदारी मांगने के पीड़ित हैं। आपको बता दें कि दिल्ली पुलिस ने नरेश बाल्यान को 30 नवंबर को गिरफ्तार किया था।
क्या है वसूली का मामला?
AAP के विधायक नरेश बाल्यान और गैंगस्टर कपिल सांगवान के बीच बातचीत का एक ऑडियो क्लिप वायरल हुआ था। दोनों के बीच बातचीत में कथित तौर पर व्यापारियों से फिरौती वसूलने की बातचीत हो रही थी। बीजेपी ने बाल्यान का एक ऑडियो क्लिप सार्वजनिक कर उनके ऊपर आरोप लगाया था। बीजेपी ने कहा था कि नरेश बाल्यान गैंगस्टर के साथ मिलकर वसूली गैंग चलाते हैं। वो हवाला के जरिए पैसों का लेनदेन करते हैं। आपको बता दें कि कपिल सांगवान ने इस समय विदेश में है।
नरेश बाल्यान को मकोका के तहत किया गया गिरफ्तार
जमानत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने नरेश बाल्यान को मकोका के तहत फिर से गिरफ्तार कर लिया। इसका सीधा संदेश यह है कि नरेश बालियान की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। नरेश बालियान के वकील ने मकोका गिरफ्तारी के बाद प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हमें तो इस बारे में कुछ भी नहीं बताया गया, कागजात तक नहीं दिए गए।
वकील का यह कहना था कि मकोका एक्ट के तहत किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले कोर्ट को सबूत पेश करने होते हैं। उन्हें तो लगता है कि यह बस एक “कस्टडी में रखने का बहाना है। उनका कहना था, “चार्जशीटेड व्यक्ति पर मकोका लगाया जाता है। अगर पुलिस के पास कुछ साबित करने के लिए नहीं है, तो मकोका की धाराओं का क्या मतलब है?
क्या होता है मकोका?
मकोका यानी महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA)। मकोका को महाराष्ट्र सरकार ने साल 1999 में संगठित अपराध को समाप्त करने के लिए लागू किया था। इस एक्ट का उद्देश्य संगठित अपराधियों, अंडरवर्ल्ड के गुर्गों और जबरन वसूली करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना था। इसका मतलब साफ है कि अगर किसी पर मकोका लग जाए तो आसानी से जमानत नहीं मिलता है। अब अगर नरेश बालियान पर मकोका लग चुका है, तो उन्हें बेल मिलना मुश्किल है।


