मुंबई में 67 साल की एक महिला से ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। धोखेबाजों ने महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital arrest) कर 14 लाख रुपये ठग लिए।
पुलिस के मुताबिक, ठगों ने बुजुर्ग महिला से मनी लॉन्ड्रिंग के एक फर्जी मामले से नाम हटाने के बदले में उसे 14 लाख रुपये का भुगतान करने के लिए मजबूर किया।
ठगों ने खुद को दिल्ली दूरसंचार विभाग और साइबर अपराध शाखा का अधिकारी बताया था।
यह घटना 1 से 5 सितंबर के बीच की है, जब कांदिवली पश्चिम में अपनी भाभी के साथ रह रही पीड़िता को दिल्ली दूरसंचार विभाग से होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति का फोन आया।
इस व्यक्ति ने महिला को बताया कि वह मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में आरोपी है और उसके आधार कार्ड का दुरुपयोग किया गया है।
बाद में वह राकेश कुमार नामक एक साइबर अपराध विभाग का अधिकारी का रूप धारण करने वाले एक अन्य घोटालेबाज से जुड़ गई। कथित अधिकारी ने उसे दिल्ली पुलिस के फर्जी आईडी दिखाए और उसे जेल भेजने की चेतावनी देकर डर का माहौल बना दिया।
डिजिटल अरेस्ट (Digital arrest) क्या होता है?
डिजिटल अरेस्ट (Digital arrest) साइबर ठगी का नया तरीका है जिसमें पीड़ितों को एक फोन कॉल, एक ई-मेल या एक संदेश प्राप्त होता है जिसमें दावा किया जाता है कि वे अवैध गतिविधियों, जैसे पहचान की चोरी या धन शोधन के लिए जांच के दायरे में हैं।
साइबर सुरक्षा एजेंसी सीईआरटी-इन की सलाह के अनुसार, धोखाधड़ी करने वाला शख्स पीड़ित को तत्काल कार्रवाई न करने पर गिरफ्तारी या कानूनी अंजाम भुगतने की धमकी देता है।
ऐसे साइबर ठग अक्सर पीड़ित की तर्कसंगत सोच को रोकने के लिए घबराहट की भावना पैदा करते हैं। इसके अलावा “अपना नाम साफ़ करने”, “जांच में मदद करने” या “वापसी योग्य सुरक्षा जमा/एस्क्रो खाते” की आड़ में, व्यक्तियों को निर्दिष्ट बैंक खातों या यूपीआई आईडी में बड़ी रकम स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया जाता है।”


