भारत की स्टार जिमनास्ट दीपा कर्माकर (Dipa Karmakar) ने खेलों की दुनिया से संन्यास का ऐलान कर दिया है।
दीपा कर्माकर ने 2016 के रियो ओलंपिक में वॉल्ट में चौथा स्थान हासिल करके भारत को जिमनास्टिक की दुनिया में चर्चा का विषय बना दिया था।
दीपा ओलंपिक पदक जीतने से महज 0.15 अंकों से चूक गई थीं। लेकिन देश की पहली महिला ओलंपियन जिमनास्ट बनने का रिकॉर्ड बना गईं।
डोपिंग और चोटों के कारण निलंबन से उबरकर दीपा (Dipa Karmakar) पिछले साल मई में ताशकंद में एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनी थीं।
दीपा कर्माकर ने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक और विश्व कप में एक स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीता।
31 साल की दीपा कर्माकर (Dipa Karmakar) ने अपने संन्यास की घोषणा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर की। दीपा ने कहा कि उन्हें अपने करियर पर गर्व है।
दीपा ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मुझे पांच साल की दीपा याद है, जिसे बताया गया था कि उसके सपाट पैरों के कारण वह कभी जिमनास्ट नहीं बन सकती। आज मैं अपनी उपलब्धियों को देखकर बहुत गौरवान्वित महसूस कर रही हूं, दुनिया के मंच पर देश का प्रतिनिधित्व कर रही हूं और पदक जीत रही हूं। सबसे खास पल रियो ओलंपिक में प्रोडुनोवा वॉल्ट करना था। यह मेरे करियर का सबसे यादगार पल है। आज मैं दीपा को देखकर बहुत खुश हूं, क्योंकि उसमें सपने देखने की हिम्मत थी।”
उन्होंने लिखा है- “एशियाई चैंपियनशिप में मेरी पिछली जीत एक महत्वपूर्ण मोड़ थी क्योंकि मुझे लगा कि मैं अपने शरीर को और आगे बढ़ा सकता हूँ। लेकिन कभी-कभी हमारा शरीर हमें बताता है कि आराम करने का समय आ गया है। दिल आज भी इसे स्वीकार नहीं करता है।”
दीपा ने कहा, “काफी सोच-विचार के बाद मैंने जिमनास्टिक से संन्यास लेने का फैसला किया है। यह फैसला मेरे लिए आसान नहीं था, लेकिन अब सही समय है। मैं हर पल, उतार-चढ़ाव और बीच में आई हर चीज के लिए आभारी हूं।”
दीपा ने कहा कि वह इस खेल में अपना योगदान देंगी। दीपा ने कहा, “जिम्नास्टिक से मेरा जुड़ाव कभी खत्म नहीं होगा। मैं इस खेल को कुछ देना चाहूंगी, शायद एक मेंटर या कोच के तौर पर, अपनी जैसी लड़कियों का समर्थन करके।”
अगरतला की रहने वाली दीपा कर्माकर (Dipa Karmakar) ने अन्य लोगों के अलावा अपने परिवार के सदस्यों और कोच बिश्वेश्वर नंदी और सोमा नंदी को 25 वर्षों तक उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।


