अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने उद्योगपति एलन मस्क (Elon Musk) और विवेक रामास्वामी (Vivek Ramaswamy) को नए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (DOGE) के लिए चुना है। इन उद्योगपतियों का काम सरकार को सलाह देना होगा।
ट्रंप (Donald Trump) ने मंगलवार रात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन नियुक्तियों की घोषणा करते हुए कहा कि डीओजीई “संभवतः हमारे समय का ‘मैनहट्टन प्रोजेक्ट’ बन सकता है”।
मैनहट्टन प्रोजेक्ट का मकसद द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका द्वारा रिकॉर्ड समय में परमाणु हथियार विकसित करने था।
इस ऐलान के बाद Elon Musk ने दावा किया, “इससे पूरी प्रणाली में और सरकारी फिजूलखर्ची में शामिल सभी लोगों में हलचल मच जाएगी!”
उन्होंने एक्स पर लिखा- “अधिकतम पारदर्शिता के लिए डीओजीई की सभी कार्रवाइयों को ऑनलाइन पोस्ट किया जाएगा। जब भी जनता को लगे कि हम किसी महत्वपूर्ण चीज में कटौती कर रहे हैं या किसी बेकार चीज में कटौती नहीं कर रहे हैं, तो हमें बताएं! यह बेहद दुखद और बेहद मनोरंजक दोनों होगा।”
Vivek Ramaswamy ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया पोस्ट की, “हम धीरे-धीरे नहीं चलेंगे।” इसके साथ ही उन्होंने एलन मस्क को टैग भी किया।
हालांकि विभाग किस तरह काम करेगा, फ्रेमवर्क क्या होगा इसे लेकर कुछ स्पष्ट नहीं कहा गया है। ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि ये दोनों अद्भुत अमेरिकी मेरे प्रशासन के डीओजीई का नेतृत्व करेंगे।”
चूंकि यह एक नया विभाग है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि इसके नेता कैबिनेट में होंगे या नहीं, उन्हें सीनेट द्वारा पुष्टि की जाएगी या नहीं, तथा उनके पद क्या होंगे।
ट्रंप (Donald Trump) ने कहा, “ये दोनों अद्भुत अमेरिकी मेरे प्रशासन के लिए नौकरशाही को खत्म करने, फिजूलखर्ची में कटौती करने, गैरजरूरी नियमों को समाप्त करने और संघीय एजेंसियों के पुनर्गठन का काम करेंगे।”
दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति Elon Musk इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला और रॉकेट कंपनी स्पेस एक्स के प्रमुख हैं। वे एक्स के मालिक हैं, जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था।
वहीं भारतवंशी Vivek Ramaswamy करोड़पति शख्स हैं और एक दवा कंपनी के फाउंडर भी हैं।
उन्होंने रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन के लिए ट्रंप के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन उनके समर्थन में उतर आए।
Elon Musk का दावा है कि वे नए विभाग के जरिए सरकारी खर्च में कम से कम 2 ट्रिलियन डॉलर (168 लाख करोड़) की कटौती कर पाएंगे।
(Source: आईएएनएस)


