बिहार में अगले साल विधानसभा का चुनाव होने वाला है। चुनाव से पहले Bihar में सियासी खेल अपने चरम सीमा पर है।
Bihar में चुनाव से पहले सत्ता परिवर्तन की हवा कभी नरम कभी गर्म हो रही है। सत्ता परिवर्तन के कयास लगाए जा रहा है। क्योंकि नीतीश कुमार ने पिछले कुछ दिनों से अलग ही रवैया अपनाया हुआ है। नीतीश कुमार बिहार में परिवर्तन रैली निकाले हुए है। उनकी रैली को देखकर यह लग रहा है कि क्या फिर से चाचा पलटेंगे?
नीतीश कुमार के हाथ रही है सत्ता की चाभी
सत्ता परिवर्तन से ज्यादा सीट शेयरिंग को लेकर के यह सारी ड्रामेबाजी चल रही है। बिहार में NDA गठबंधन में नीतीश कुमार को हमेशा से ही बड़े भाई के रोल में देखा जाता रहा हैं। बीजेपी ने हमेशा उनको अपना बड़ा भाई माना है। पिछले 20 साल से बिहार की सत्ता की चाभी नीतीश कुमार के हाथ में ही रही है। चाहे चुनाव में किसी भी पार्टी को बहुमत आए। मुख्यमंत्री हमेशा नीतीश कुमार ही बनते रहे हैं। जिस तरीके से सत्ता की चाभी उनके हाथ में रही है तो इस हिसाब से बीजेपी को यह लगता है कि किसी एक कड़ी को हमेशा पकड़ के अपने साथ रखना चाहिए।
लालू यादव बीजेपी के साथ कभी नहीं आ सकते हैं जो अब तक उनकी राजनीति का तरीका रहा है और जिस तरीके से वह अपने आप को एक अलग सिर्फ सेकुलर और मुसलमान के हितैषी दिखते रहे हैं। ऐसे में RJD का बीजेपी के साथ जाना संभव नहीं है। शायद ही लालू यादव कभी बीजेपी के साथ जाए वैसे राजनीति में कुछ भी हो सकता है। हम इस बात का दावा भी नहीं करते हैं।
लालू यादव और बीजेपी कभी एक नहीं हो सकते हैं। लेकिन नीतीश कुमार के भाजपा के साथ शुरू से रहे हैं। 2025 को देखते हुए यह महसूस हो रहा है कि चूंकि पिछली बार उनकी पार्टी की परफॉर्मेंस खराब रही थी। इसके बावजूद भी बीजेपी ने नीतीश कुमार को ही सीएम बनाया गया था।
नीतीश कुमार की सेहत नहीं है ठीक
आपको बताते चलें कि नीतीश कुमार अपनी सेहत को लेकर भी आजकाल चर्चाओं में बने हुए हैं। बताया जा रहा है कि उनकी सेहत अच्छी नहीं है, उनकी उम्र हो चुकी है। उनकी उम्र का तकाजा भी उनके चेहरे पर दिखता है। अब ऐसे हालात में बीजेपी बिहार की सत्ता में काबिज होना चाहती है। बीजेपी महाराष्ट्र चुनाव जीतने के बाद से ही कॉन्फिडेंस में हैं। और बिहार में भी महाराष्ट्र मॉडल को लागू करना चाहती है। बीजेपी नीतीश कुमार को अपना छोटा भाई बनने पर मजबूर कर रही है और नीतीश कुमार कतई इस बात के लिए राजी नहीं है और ना ही हो सकते हैं।
नीतीश कुमार का जो नेचर अब तक उनकी राजनीतिक करियर को देखकर के बताया जा सकता है कि वह इस तरीके से कभी बीजेपी के दबाव में आकर किसी तरह का फैसला नहीं लेंगे। नीतीश कुमार ने हमेशा से NDA गठबंधन में अपने आप को बड़ा भाई बनाकर रखा है और आगे भी अपने आप को बड़ा भाई बनाकर रखेंगे। ये सब प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा है।
नीतीश कुमार कर रहे हैं प्रगति यात्रा
नीतीश कुमार बिहार की राजनीति को कभी नरम कर रहे हैं कभी गर्म कर रहे हैं। अभी कल ही बात देखिए नीतीश कुमार चंपारण में अपनी प्रगति यात्रा कर रहे थे। जिस तरीके से उन्होंने मीडिया से बात नहीं कि इस तरीके से जो पोस्टर लगे उससे साफ जाहिर होता है कि वह बीजेपी को क्या संदेश देना चाहते हैं। पोस्टर देखकर साफ जाहिर हो रहा था कि नीतीश कुमार अपने सहयोगी दलों से यह कहना चाहते है कि तुम्हारा बड़ा भाई मैं हूं मेरे बगैर तुम सत्ता में नहीं आ सकते हो। कभी भी तुम्हें सत्ता से बेदखल कर दिया जा सकता है।
किसी को यकीन तक नहीं हो रहा है कि JDU रातो रात अपने सहयोगी दलों पर इतना हमलावर कैसे हो गई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या नीतीश कुमार फिर से पलटी मारेंगे। क्योंकि पिछली बार जब नीतीश कुमार पलटी मारे थे उससे 15-20 दिन पहले से ही RJD वाले नीतीश कुमार पर हमलावर हो गए थे। उसके बाद एकाएक बिना किसी को कानों कान खबर हुए नीतीश कुमार ने पलटी मार दी थी।
चिराग पासवान ने नीतीश कुमार को किया था नुकसान
ये कहना मुश्किल है कि बिहार में सत्ता पलटेगी लेकिन यह हम कह सकते हैं कि प्रेशर पॉलिटिक्स का फायदा नीतीश कुमार को 2025 की सीट शेयरिंग में हो सकता है। इसकी वजह यह भी है कि पिछले विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने जो किया था उसको इस बार रोका जा सके। चिराग पासवान के कारण नीतीश कुमार को बड़ा नुकसान हुआ था। चिराग पासवान ने सिर्फ एक सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन कई सीटों पर नीतीश कुमार को बड़ा नुकसान किया था।
चिराग पासवान के कारण ही नीतीश कुमार की पार्टी तीसरे स्थान पर पहुंच गई। यह जगह जाहिर है कि यह सब कुछ भाजपा के इशारे पर हुआ था। चिराग पासवान की पार्टी ने मैक्सिमम बीजेपी के कैंडिडेट को टिकट दिया था। चिराग पासवान की पार्टी ने तमाम सीटों पर नीतीश कुमार की पार्टी को हराने का काम किया और JDU को 43 सीटों पर रोक दिया।
नीतीश कुमार कर रहे हैं प्रेशर पॉलिटिक्स
नीतीश कुमार को इस बात का पूरा इल्म है कि वह सीट शेयरिंग को लेकर कोई खतरा नहीं मोल ले रहे हैं। सीट शेयरिंग के मसले को देखते हुए उन्होंने अपनी राजनीति में प्रेशर पॉलिटिक्स की शुरुआत कर दी है। बिहार की राजनीति को समझने वाले पंडितों का कहना है कि यूं ही चिराग पासवान ने अपने आप को बिहार की तरफ ले जाने की बात नहीं कही है। चिराग पासवान ने हाल ही में विधानसभा चुनाव लड़ने का इशारा किया था।
क्या बीजेपी यह चाल चल सकती है कि चिराग पासवान को धीरे से आगे करके और चिराग पासवान से यह कहे कि भाई आप आगे बढ़ो हम आपको मुख्यमंत्री बनने में सपोर्ट करेंगे। मुख्यमंत्री का पद एक ऐसा सपना है किसी को भी दिखा कर भाजपा कभी भी नीतीश कुमार को बेदखल करने में कामयाबी की तरफ बढ़ सकती है।
बीजेपी ने कई राज्यों में कर चुकी है खेल
बीजेपी ने कई राज्यों में ऐसा किया भी है। जहां अपने साथी सहयोगी दलों के साथ भाजपा का रवैया रहा है। चाहे आप महाराष्ट्र की राजनीति देख लीजिए या मध्य प्रदेश की या कर्नाटक। हर जगह पर भाजपा ने ऑपरेशन लोटस के तहत पार्टियों को तोड़कर, सरकार गिराकर अपनी पार्टी की सरकार बना ली। यह डर नीतीश कुमार को भी सता रही है।
नीतीश कुमार कहीं ना कहीं सेहत से कमजोर है उम्र हो चुकी है कई बार कई चीजे उनकी देखने को सोशल मीडिया पर दिख जाती है। तो इस तरीके से यह माना जा रहा है कि नीतीश कुमार इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अपना काम कर रहे हैं। और प्रगति सिर्फ बिहार की नहीं अपनी पार्टी की प्रगति और अपनी सत्ता की प्रगति पर भी उनका ध्यान केंद्रित है।


