भुखमरी के मामले में भारत की स्थिति गंभीर बनी हुई है। ताजा रैंकिंग (GHI 2024) में भारत की स्थिति पाकिस्तान से तो थोड़ी बेहतर है, जबकि अन्य पड़ोसी मुल्क जैसे- नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश हमसे बेहतर स्थिति में हैं।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) 2024 की लिस्ट में इस साल भारत 127 देशों में 105वें नंबर पर है। वहीं श्रीलंका 56वें, नेपाल 68वें और बांग्लादेश 84वें नंबर पर है। पाकिस्तान की रैंकिंग 109 है।
पिछले साल की बात की जाए तो Global Hunger Index के मामले में भारत की स्थिति कुछ बेहतर हुई है। साल 2023 की रैंकिंग के मुताबिक, 125 देशों में भारत 111वें नंबर पर था।
बीते साल इस लिस्ट में पाकिस्तान की रैंकिंग 102, बांग्लादेश की 81, नेपाल की 69 और श्रीलंका की 60 थी।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI 2024) में अभी भारत का स्कोर 27.3 है यानी भारत में अभी भी हंगर इंडेक्स 27.3 बना हुआ है जो कि गंभीर है।
पिछले साल यह स्कोर 28.7 था, उस वक़्त भी भारत में भुखमरी की हालत को गंभीर बताया गया।
इस तरह देखा जाए तो नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे मुल्क अपने लोगों को भूख से बचाने में हमसे बेहतर स्थिति में हैं।
GHI का लेवल अगर 20-34.9 के बीच है तो यह गंभीर की श्रेणी में आता है, 10-19.9 के बीच सामान्य और 9.9 के बराबर या इससे कम है तो इसका मतलब है कि भुखमरी की हालत कम है।
लेवल अगर 35-49.9 है तो हालात चिंताजनक हैं जबकि 50 या इससे ज्यादा स्कोर का मतलब है कि स्थिति बेहद चिंताजनक है।
10 सालों में खराब हुई है स्थिति
ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI 2024) के पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो हम पाते हैं कि भारत की हालत खराब होती गई है।
साल 2014 में भारत की रैंकिंग 55 थी, 2015 में 80, 2016 में 97, 2017 में 100, 2018 में 103, 2019 में 102, 2020 में 94, 2021 में 101, 2022 में 107 और 2023 में 111 थी।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स क्या होता है?
ग्लोबल हंगर इंडेक्स (GHI) बताता है कि किसी भी देश में भुखमरी की स्थिति क्या है। इस लिस्ट को हर साल कंसर्न वर्ल्डवाइड और वर्ल्ड हंगर हेल्प (जर्मनी में Welthungerhilfe) नामक यूरोपीयन NGO तैयार करते हैं। दुनियाभर के अलग-अलग देशों में 4 पैमानों का आंकलन करने के बाद इंडेक्स को तैयार किया जाता है।
ये चार पैमाने हैं:-
कुपोषित आबादी: GHI 2024 के मुताबिक, भारत की 13.7 फीसदी आबादी कुपोषित है।
पांच साल से कम उम्र के बच्चों में से 35.5 फीसदी बच्चे बौने हैं यानी उनकी लंबाई उम्र के मुताबिक नहीं है।
पांच साल से कम उम्र के बच्चों में से 18.7% बच्चे कुपोषित हैं यानी उनका वजन उम्र के हिसाब से कम है।
पाँच साल की उम्र से पहले जान गँवाने वाले बच्चे, इनकी आबादी 2.9 फीसदी है।


