धूम्रपान (Smoking) सेहत के लिए हानिकारक होता है। फिर भी अधिकांश लोग इसकी जद में फंसे रहते हैं।
धूम्रपान (Smoking) की लत को नहीं छोड़ने का सबसे बड़ा कारण मोटिवेशन की कमी को माना जाता है। अधिकांश लोग सोचते हैं कि धूम्रपान (Smoking) छोड़कर भी क्या ही फायदा होगा। उन सभी लोगों के लिए इस आर्टिकल में बहुत कुछ है।
द लैंसेट पब्लिक हेल्थ जर्नल की एक स्टडी में सामने आया है कि अगर 2050 तक धूम्रपान (Smoking) की दर को मौजूदा दर से अगर पांच प्रतिशत तक कम कर दिया जाता है तो पुरुषों का जीवन एक साल बढ़ जाएगा। वहीं महिलाओं का जीवन 0.2 साल बढ़ेगा।
शोधकर्ताओं ने पाया कि मौजूदा डाटा के अनुसार 2050 तक दुनिया भर में धूम्रपान (Smoking) की दरें पुरुषों में 21 प्रतिशत और महिलाओं में लगभग चार प्रतिशत तक घट सकती हैं।
दुनिया भर में धूम्रपान (Smoking) से लाखों लोगों की मौत होती है। धूम्रपान साल 2021 में हर 10 में से 1 से ज्यादा मौतों के लिए जिम्मेदार था। पिछले तीन दशकों में धूम्रपान की दरों को कम करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। लेकिन कई क्षेत्रों में काम की गति बहुत धीमी होने की वजह से लाखों लोग धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
धूम्रपान के कारण कैंसर, हृदय रोग और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी बीमारियों के कारण सैकड़ों लोगों की मौत होती है।
कई देशों ने धूम्रपान (Smoking) की दरों को 5 फीसदी से कम करने के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। जिसका उद्देश्य आने वाले दशकों में इस लक्ष्य को प्राप्त करना है।
स्टडी में इस बात पर जोर दिया गया है कि निरंतर वैश्विक सहयोग और तंबाकू नियंत्रण नीतियों का कार्यान्वयन धूम्रपान में कमी लाने में मददगार साबित हो सकती है।
इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) के प्रोफेसर स्टीन एमिल वोलसेट ने कहा, “हमें दुनियाभर में धूम्रपान (Smoking) को कम करने और समाप्त करने के प्रयासों में तेजी लानी होगी। हमारे निष्कर्ष इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि धूम्रपान को समाप्त करके लाखों असामयिक मौतों को टाला जा सकता है।”
अध्ययन में यह भी पाया गया है कि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने से 2095 तक 185 देशों में 1.2 मिलियन फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों को रोका जा सकता है। इनमें से लगभग दो-तिहाई मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रोकी जा सकती हैं। क्योंकि इन देशों की जनसंख्या में युवा जनसंख्या का अनुपात अधिक है।
शोधकर्ताओं ने वर्तमान तंबाकू नीतियों को बनाए रखने के साथ-साथ नई नीतियों को लागू करने का अनुरोध किया है ताकि धूम्रपान से संबंधित बीमारियों के जोखिम को टाला जा सके।


