हिमाचल के मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। उन्होंने निरस्त किए जा चुके तीनों कृषि कानून को वापस लाने की मांग की है।
बीजेपी सांसद और बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangana Ranaut) ने मांग की है कि निरस्त किए जा चुके तीनों कृषि कानूनों को फिर से बहाल किया जाए। कंगना ने दावा किया कि तीनों कानून किसानों के हित में थे और किसानों को खुद इसे वापस लाने की मांग करनी चाहिए।
अपने बयानों के कारण कगंना रनौत (Kangana Ranaut) हमेशा चर्चा में बनी रहती हैं। कंगना के इस बयान ने एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि उनकी इस बात पर भी विवाद हो, लेकिन इसे लागू करना चाहिए।
कंगना (Kangana Ranaut) ने सोमवार को मंडी के नाचन विधानसभा में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की और सदस्यता अभियान में हिस्सा लिया। मंडी से सांसद कंगना ने कहा कि किसान देश के विकास में एक पिलर ऑफ स्ट्रेन्थ हैं।
उन्होंने कहा, “मैं कहना चाहती हूं कि किसान खुद ही सरकार से अपील करें कि हमारे तीनों कृषि कानून को वापस लाया जाए। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों के किसानों ने तीन कृषि कानून को लेकर आपत्ति जताई थी, मैं सभी से हाथ जोड़कर विनती करती हूं कि सब किसानों के हित को ध्यान में रखकर वे कानून वापस लाने की मांग करें।”
कांग्रेस ने किया पलटवार
कंगना रनौत (Kangana Ranaut) के इस बयान पर कांग्रेस पार्टी ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने किसानों पर लादे गए 3 काले कानून वापस लाने की मांग की है। देश के 750 से ज्यादा किसान शहीद हुए, तब जाकर मोदी सरकार की नींद टूटी और ये काले कानून वापस हुए। अब बीजेपी के सांसद फिर से इन कानून की वापसी का प्लान बना रहे हैं। कांग्रेस किसानों के साथ है। इन काले कानून की वापसी अब कभी नहीं होगी, चाहे नरेंद्र मोदी और उनके सांसद जितना जोर लगा लें।
मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान तीन कृषि कानूनों को संसद से पास किया था। कृषक उपज व्यापार और वणिज्य अधिनियम 2020, कृषक कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम 2020 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 2020 कानून को मोदी सरकार ने पास किया था। इन तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ खूब विरोध हुआ था। एक साल तक दिल्ली की सीमाओं पर किसान धरना दिए थे। 2021 के नवंबर के अंत में पीएम नरेंद्र मोदी ने तीनों कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की थी।


