केंद्र सरकार ने गुरुवार को कैबिनेट बैठक में One nation One Election के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार अगले हफ्ते संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान विधेयक पेश कर सकती है। भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों को 13 और 14 दिसंबर को संसद में उपस्थित रहने के व्हिप जारी किया है।
शीतकालीन सत्र में पेश होगा विधेयक
सबसे पहले जेपीसी की कमेटी का गठन किया जाएगा और सभी दलों के सुझाव लिए जाएंगे। सत्र के अंत में इस विधेयक को संसद में बिल के रूप लाया जाएगा। आपको बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अध्यक्षता में बनी कमेटी ने एक देश, एक चुनाव से जुड़ी अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की योजना बना रही है। जेपीसी सभी पार्टियों के साथ विस्तृत चर्चा करेगी और इस प्रस्ताव पर सामूहिक सहमति बनाकर ही विधेयक पास करेगी।
इंडिया गठबंधन करेगी विधेयक का विरोध
आपको बता दें कि फिलहाल देश में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। इस विधेयक के कानून बनने के बाद देश में एक साथ चुनाव कराया जाएगा। सरकार के इस विधेयक का इंडिया गठबंधन विरोध करेगी। वहीं, एनडीए गठबंधन के सहयोगी जेडीयू और लोजपा जैसी पार्टियों का समर्थन है।
बार-बार चुनाव के कारण देश की प्रगति में होता है रुकावट- शिवरजा सिंह चौहान
इससे पहले बुधवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वन नेशन वन इलेक्शन के पक्ष में जोरदार समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव देश की प्रगति में रुकावट डाल रहे हैं। कुरुक्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और भारत जल्द ही “विश्व गुरु” बनकर दुनिया के सामने आएगा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एक समृद्ध, शक्तिशाली और गौरवमयी भारत बन रहा है। इसके बारे में कोई संदेह नहीं है और पूरी दुनिया इसे जानती है।”
चुनाव की तैयारियां पूरे पांच साल चलती रहती है- शिवराज सिंह चौहान
चौहान ने आगे कहा कि भारत की प्रगति में एक प्रमुख रुकावट बार-बार होने वाले चुनाव हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए तैयारियां पूरे पांच साल चलती रहती हैं। लोकसभा चुनाव खत्म होते हैं, फिर विधानसभा चुनाव आते हैं। हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र और झारखंड के चुनाव हो चुके हैं, अब दिल्ली विधानसभा चुनाव आ रहा हैं। सभी सांसद और विधायक चुनाव में व्यस्त हो जाएंगे।


