साल 2006, नोएडा का सेक्टर 31 और उसके करीब बसा निठारी गांव (Nithari)। इस गांव में हुए निठारी कांड (Nithari Case) ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। देश के कोने कोने में बसे लोग, नोएडा के निठारी गांव (Nithari Village) को जानने लगे थे।
दरअसल, जब इस गांव के पास बहते नाले से नर कंकाल बरामद हुए तो हर कोई सकते में आ गया। नाले से मिल रहे नर कंकाल किसके हैं, जब इस सवाल का जवाब मिला तो सुनने वालो के रोंगटे खड़े हो गए।
नोएडा के निठारी (Nithari) से मिल रहे नर कंकाल बच्चों के थे। लेकिन ये बच्चे कौन थे, कहां के रहने वाले थे, उनकी हत्या किसने की, उनकी लाश के टुकड़े करके नाले में किसने फेंके… ये वो सवाल थे जो उस वक्त नोएडा पुलिस के लिए चुनौती बने हुए थे। लेकिन, जब पुलिस ने गहनता से जांच की तो कई सवालों के जवाब मिलने लगे।
जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो केस पर चढ़ी सवालों की परत उतरने लगी। पता चला कि नाले से जो कंकाल मिल रहे हैं वो निठारी (Nithari) गांव के बच्चों के हैं। ये भी पता चला कि उन बच्चों के अपहरण और हत्या के पीछे सेक्टर 31 (Sector 31) की कोठी नंबर डी-5 (D-5) में रहने वाले मोनिंदर सिंह पंढेर (Moninder Singh Pandher) और सुरेंद्र कोली (Surendra Koli) का हाथ था। जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
निठारी हत्याकांड (Nithari Case) का खुलासा पायल नाम की लड़की की गुमशुदगी और हत्या की जांच के बाद हुआ था। शुरुआत में मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली पर 31 बच्चों की हत्या के आरोप लगे थे। लेकिन जांच में 19 बच्चों की हत्या, यौन शोषण और अपराध के सबूत मिटाने की बात सामने आई थी।
निठारी कांड केस (Nithari Case) में कब क्या हुआ ?
29 दिसंबर 2006 – दिल्ली से सटे नौएडा में मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले से पुलिस को 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले।
29 दिसंबर 2006 – मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को पुलिस गिरफ्तार करती है।
30 दिसंबर 2006 – सीबीआई (CBI) को जांच के दौरान इंसानी हड्डियों के कुछ हिस्से और 40 ऐसे पैकेट मिलते हैं जिनमें मानव अंगों को भरकर नाले में फेंक गया था।
5 जनवरी 2007 – मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को पुलिस नार्को टेस्ट (Narco Test) के लिए गांधीनगर ले कर जाती है।
25 जनवरी 2007 – पंढेर और कोली के साथ गाजियाबाद की एक अदालत के परिसर में मारपीट होती है।
7 अप्रैल 2007 – पिंकी नाम की लड़की के कंकाल की शिनाख्त उसके कपड़ों के जरिए होती है।
8 फरवरी 2007 – कोली और पंढेर को 14 दिन की सीबीआई कस्टडी (CBI Custody) में भेजा जाता है।
मई 2007 – सीबीआई ने पंढेर को अपनी चार्जशीट में रिम्पा हलदर के अपहरण, बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपमुक्त कर दिया था। लेकिन अदालत की फटकार के बाद सीबीआई रिम्पा हलदर के मामले में पंढेर को सह-अभियुक्त बनाती है।
13 फरवरी 2009 – विशेष अदालत (Special Court) ने पंढेर और कोली को 15 साल की रिम्पा हलदर के अपहरण, बलात्कार और हत्या का दोषी करार देते हुए मौत की सज़ा सुनाती है।
11 सितंबर 2009 – इलाहाबार हाईकोर्ट, एक मामले में मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी करती है, और सुरेंद्र कोली की मौत की सजा को बरकरार रखती।
4 मई 2010 – सीबीआई की एक विशेष अदालत सुरेंद्र कोली को 7 साल की आरती की हत्या का दोषी करार देती.
28 अक्तूबर 2014 – सुरेंद्र कोली की फांसी पर सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका को खारिज किया।
28 जनवरी 2015 – रिम्पा हलदर हत्या मामले में सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उम्र कैद में तब्दील किया।
16 अक्टूबर 2023 को निठारी कांड के आरोपी मोनिंदर सिंह पंढेर और सुरेंद्र कोली को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरी करने का आदेश दिया। दोनों को मिली फांसी की सजा भी अदालत ने रद्द कर दी।


