नोएडा के एक नामी स्कूल में प्री-नर्सरी में पढ़ने वाली बच्ची से डिजिटल रेप (Digital Rape) का मामला सामने आया है।
पुलिस ने इस सिलसिले में लापरवाही बरतने को लेकर क्लास टीचर और स्कूल एडमिन को गिरफ्तार कर लिया है।
घटना सेक्टर 20 थाना क्षेत्र स्थित सेक्टर 27 स्थित कैंब्रिज स्कूल की है। पुलिस की जांच में क्लास टीचर और स्कूल एडमिन की गलती सामने आई है।
बताया जा रहा है कि घटना के दिन छात्रा ने क्लास टीचर को घटना के बारे में बताया था लेकिन टीचर ने घर पर न बोलने और खामोश रहने के लिए कहा था।
छात्रा को अस्पताल ले जाने पर परिवार को घटना की जानकारी हुई। इस घटना के आरोपी स्कूल के सफाईकर्मी को पुलिस जेल भेज चुकी है।
नोएडा में ही दो साल पहले डिजिटल रेप (Digital Rape) का एक मामला सामने आया था। उस वक़्त 65 साल के एक व्यक्ति ने तीन साल बच्ची के साथ डिजिटल रेप किया था। 2022 की यह घटना नोएडा के सलारपुर कस्बे में हुई थी।
क्या है डिजिटल रेप?
‘डिजिटल रेप’ (Digital Rape) ने पूरे देश में हलचल मचा दी है। इसलिए ऐसी अटकलें लगाई जा सकती हैं कि ‘रेप’ शब्द के आगे लगा ‘डिजिटल’ शब्द डिजिटल दुनिया से जुड़ा है।
हालाँकि, डिजिटल रेप (Digital Rape) का कंप्यूटर, फ़ोन, लैपटॉप या मेटा के स्वामित्व वाले प्लेटफ़ॉर्म जैसे गैजेट से कोई लेना-देना नहीं है। यह शब्द अंग्रेज़ी के शब्द ‘डिजिट’ से लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ संख्या और पूर्णांक है।
इसके अलावा, इस शब्द का मतलब उंगली या पैर का अंगूठा भी होता है। ‘डिजिटल रेप’ शब्द जेंडर-न्यूट्रल है और सभी प्रकार के पीड़ितों और अपराधियों पर लागू होता है।
बलात्कार पीड़ितों को आगे दो श्रेणियों में विभाजित किया जाता है: वयस्क और नाबालिग।
POCSO अधिनियम के अनुसार, अपराध करने वाले दो प्रकार के अपराधी हैं – नाबालिग डिजिटल बलात्कारी और बड़े डिजिटल बलात्कारी। इस तरह का अपराध करने वाले लोगों पर POCSO अधिनियम की धारा 5 और 6 के तहत 10 साल तक की कैद और 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।


