‘मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें, मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं!’ ये शेर है पाकिस्तान के हरदिल अज़ीज़ मशहूर शायर जॉन एलिया का… (Biryani Story)
ये शेर इसलिए आपको सुनाया गया क्योंकि मामला भी पाकिस्तान का है और जुड़ा है किताबों से…
क्योंकि जिस देश का शायर इस तरह का कलाम कह जाए तो जरा सोचिए वहां की आवाम को पढ़ने- लिखने का कितना शौक होगा…
लेकिन हाल ही में पाकिस्तान के लाहौर का एक वाकया (Biryani Story) सामने आया है जिसमें कुछ लोगों ने किताबों के ऊपर बिरयानी को चुना… जी हां हम बात कर रहे हैं उसी मामले की जो आजकल सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
मामला कुछ ऐसा है…
पाकिस्तान के लाहौर में लगा एक बुक फेयर.. लेकिन चर्चा बुक फेयर की नहीं बल्कि बुक फेयर में बिकी किताबों के नम्बर की हो रही है। आयोजकों को लगा था कि पढ़ने-लिखने वाले लोग आएंगे… साहित्य कला की किताबों में रुचि दिखाएंगे.. किताबें खरीदेंगे… लेकिन वहां पहुंचे लोगों को किताबों से ज्यादा इंट्रेस्ट था बिरयानी में… और साथ ही साथ खाने के दूसरे आइटम में…
साहित्य, कला, विज्ञान, ज्ञान… एक प्लेट बिरयानी पर इस कदर भी भारी पड़ सकता है ये अभी तक तो शायद ही किसी ने सोचा होगा..
यहां सिर्फ 35 किताबें बिकी हैं, जबकि बिरयानी (Biryani) की 800 प्लेट लोगों ने खा ली.
लोगों ने 1200 प्लेट शवरमा की खाई और बिरयानी (Biryani) की 800 प्लेटें चट कर गए! सोशल मीडिया पर भारतीयों के साथ-साथ पाकिस्तानी भी अपने ही देश के लोगों को ट्रोल करते नजर आए.
फ्रंट पेज पाकिस्तान नाम के एक पाकिस्तानी ट्विटर अकाउंट ने इस घटना से जुड़ा पोस्ट शेयर किया. वहीं कई लोगों ने कहा कि लगता है लोगों ने उसे बुक फेयर नहीं, फूड फेयर समझ लिया था. अब सवाल ये उठता है कि क्या वाकई ऐसा है?


