पाकिस्तान (Pakistan) का आर्थिक संकट अब अपने चरम पर पहुंच गया है। सरकार ने IMF, वर्ल्ड बैंक और ADB सहित कई संस्थाओं से सहायता मांगी, लेकिन कोई भी आसानी से मदद देने को तैयार नहीं था।
हालांकि, IMF की शर्तों को स्वीकार करते हुए पाकिस्तान (Pakistan) सरकार ने संकट से उबरने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। इनमें लगभग 1.5 लाख नौकरियों को खत्म करना, 6 मंत्रालयों को बंद करना और दो मंत्रालयों का विलय शामिल है। इन कदमों से पाकिस्तान को 7 अरब डॉलर के कर्ज़ की मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है, लेकिन इसका भारी बोझ वहां की जनता पर पड़ेगा।
बीते रविवार को पाकिस्तानी वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने सरकारी नौकरियों में कटौती की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह कदम IMF से मिलने वाले 7 अरब अमेरिकी डॉलर के ऋण समझौते के कारण उठाया गया है।
IMF के दबाव के सामने झुकते हुए पाकिस्तान (Pakistan) सरकार ने उसकी कई मांगों को मान लिया है। इसके साथ ही आईएमएफ ने 1 अरब डॉलर की पहली किस्त भी जारी कर दी है।
अमेरिका से लौटने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने कहा, “हमने अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए IMF की सभी शर्तें स्वीकार कर ली हैं। यह हमारे लिए उनका अंतिम कार्यक्रम है और हमें अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा। सभी मंत्रालयों का आकार छोटा करने की योजना पर काम चल रहा है और 6 मंत्रालय बंद किए जाएंगे।
वित्त मंत्री ने कहा, “पाकिस्तान में सरकारी विभागों में करीब 1.5 लाख पद समाप्त किए जाएंगे और हमें अपने टैक्स राजस्व में वृद्धि करनी होगी। इस साल करीब 7.32 लाख नए करदाता जुड़े हैं। अब टैक्स न भरने वालों को संपत्ति और गाड़ियों की खरीद की अनुमति नहीं दी जाएगी।”
मोहम्मद औरंगजेब ने आगे कहा कि, “अर्थव्यवस्था सही दिशा में बढ़ रही है। महंगाई में कमी आई है, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है, और हमारा निर्यात भी बढ़ रहा है।” उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि देश में ब्याज दरें और कम हो सकती हैं।
आपको बता दें कि IMF ने 26 सितंबर को पाकिस्तान के लिए 7 अरब डॉलर के सहायता पैकेज को मंजूरी दी थी, जिसके तहत 1 अरब डॉलर की पहली किस्त भी जारी की गई है। पाकिस्तान 2023 में दिवालिया होने के कगार पर था, लेकिन आईएमएफ से मिले 3 अरब डॉलर के कर्ज ने उसकी स्थिति में सुधार लाने में मदद की थी।


