बिहार की राजनीति में एक नई पार्टी की एंट्री हो चुकी है। ये पार्टी है प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की। नाम है जन सुराज पार्टी।
चुनाव प्रबंधन और रणनीतिक कौशल के खिलाड़ी प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) अब राजनीति के मैदान में उतर गए हैं।
अलग अलग पार्टियों के लिए ये चुनावी रणनीति बनाने के बाद प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने अपनी पार्टी के लिए क्या रणनीति बनाई है। ये किस स्ट्रेटेजी पर काम कर रहे हैं। और क्या है इनका इमोशनल गेम? इस कहानी में हम आपको ये ही बताएंगे…
प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) पिछले करीब 2 साल से जन सुराज अभियान चला रहे थे। इस अभियान को उन्होंने राजनीति का चोला पहना दिया है। लेकिन यहां एक ट्विस्ट है।
जब जन सुराज (Jan Suraaj) अभियान की शुरुआत की गई तो प्रशांत किशोर मुसलमानों के मुद्दों को उठाते दिखे। ऐसा लगा जैसे प्रशांत किशोर मुसलमानों के साथ इमोशनली अटैच हो रहे हैं। इस वजह से चर्चा होने लगी की उनकी पार्टी का अध्यक्ष कोई मुस्लिम चेहरा हो सकता है।
लेकिन जब जन सुराज पार्टी के अध्यक्ष का नाम सामने आया तो तस्वीर साफ हो गई। प्रशांत किशोर ने दलित समाज से आने वाले मनोज भारती को पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष घोषित कर दिया।
अब सवाल ये है कि क्या प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने दलित और मुस्लिम समाज के साथ इमोशनल कार्ड खेला है या प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति में लोगों के साथ इमोशनल गेम खेलना है?
तो बिहार विधानसभा चुनावों के लिए प्रशांत किशोर की रणनीति तैयार हो चुकी है। जन सुराज अभियान के दौरान उन्होंने मुस्लमानों के हक की बात की, वो मुस्लिम समुदाय के करीब गए, उनसे गलबहियां की और जब मौका आया तो थाली दलितों की तरफ बढ़ा दी।
इस तरह देखा जाए तो जन सुराज पार्टी का गेम तैयार है। मुस्लिम समाज के खैरख्वाह बनते दिखो और दलित वोटबैंक को साधे रहो..सवर्ण तो अपने हैं ही…
और हां …प्रशांत किशोर ने कहा है कि जन सुराज पार्टी के झंडे पर महात्मा गांधी के साथ बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की भी तस्वीर भी होगी।
देखा जाए तो प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति का गेम इमोशनल भी है और पॉलिटिकल भी। गांधी का सुराज भी है और अंबेडकर की जनता भी।
अब प्रशांत किशोर की पार्टी का पांच सूत्री विकास मंत्र समझ लेते हैं कि इनमें कौन सा इमोशनल गेम सेट है।
जन सुराज का फोकस युवाओं, किसानों, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों पर रहेगा। यानी बिल्कुल अलग गेम प्लान। किसी और पार्टी ने आजतक इनकी तरफ ध्यान ही नहीं दिया।
अपने भाषण में प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के लोगों को दिल्ली की मेहरबानी नहीं चाहिए। बिहार के लोग खुद ही इतना सक्षम बनेंगे कि दूसरे राज्यों की मदद करेंगे।
प्रशांत किशोर दावा कर रहे हैं कि जब उनकी सरकार आएगी तो बिहार में विश्वस्तरीय शिक्षा होगी। वो सरकार में आते ही एक घंटे के अंदर शराबबंदी को हटाएंगे, फिर शराब पर टैक्स से जो पैसा आएगा, उसे केवल शिक्षा पर ही खर्च किया जाएगा।


