बेंगलुरू में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच में न्यूजीलैंड के रचिन रवींद्र (Rachin Ravindra) के खेल की खूब तारीफ हो रही है। वजह ये है कि रचिन रविंद्र ने भारत के खिलाफ शानदार शतक लगाया है।
रचिन रवींद्र की शानदार शतकीय पारी पर चिन्नास्वामी स्टेडियम में शुक्रवार को खूब तालियाँ बजीं।
रचिन रवींद्र करीब 12 साल बाद से भारत में शतक बनाने वाले न्यूजीलैंड के पहले बल्लेबाज बने हैं। इससे पहले न्यूजीलैंड के रॉस टेलर ने 2012 में बेंगलुरु में इसी मैदान पर 127 गेंदों पर 113 रन बनाए थे।
बेंगलुरू टेस्ट मैच के तीसरे दिन (शुक्रवार को) रचिन रवींद्र ने 157 गेंदों पर 13 चौकों और 4 छक्कों की मदद से 134 रन बनाए।
रचिन रवींद्र (Rachin Ravindra) ने टिम साउथी (65) के साथ आठवें विकेट के लिए 137 रन जोड़े।
आपको बता दें कि गुरुवार को टीम इंडिया अपनी पहली पारी में 46 रन पर सिमट गई थी।
बेंगलुरु के ‘लोकल बॉय’ हैं रचिन रवींद्र
बेंगलुरू टेस्ट के तीसरे दिन अपनी बल्लेबाजी से कमाल करने वाले रचिन रवींद्र भले ही न्यूज़ीलैंड की टीम में खेलते हैं लेकिन उनकी जड़ें बेंगलुरु से ही हैं।
रचिन रवींद्र (Rachin Ravindra) का जन्म 18 नवंबर 1999 को न्यूजीलैंड के वेलिंगटन में हुआ था। उनके पिता रवि कृष्णमूर्ति पेशे से सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट थे जो 1997 में न्यूजीलैंड में बस गए थे।
क्रिकेट हमेशा से रचिन रविंद्र के परिवार का हिस्सा रहा है। उनके पिता क्रिकेट के दीवाने थे, जो न्यूजीलैंड जाने के बाद भी क्लब स्तर पर खेलते रहे।
रचिन का मानना था कि उनका नाम उनके पिता के पसंदीदा क्रिकेटरों – सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ (राहुल से “रा” और सचिन से “चिन”) के नाम पर रखा गया था। लेकिन यह नाम महज़ एक संयोग था।
रचिन रवींद्र का करियर
रचिन रवींद्र (Rachin Ravindra) 2016 में अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप के लिए न्यूजीलैंड टीम का हिस्सा थे। महज 16 साल की उम्र में वह न्यूजीलैंड टीम के सबसे युवा खिलाड़ी थे।
रचिन रवींद्र (Rachin Ravindra) पिछले साल भारत में खेले गए विश्व कप के एक मैच में न्यूजीलैंड की तरफ से सबसे तेज शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बने थे।
इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए इस मुकाबले में रचिन ने 96 गेंदों में 123 रन बनाए थे, जिसमें 11 चौके और 5 शानदार छक्के भी शामिल थे।
इस तरह वनडे विश्व कप में अपना पहला मैच खेलते हुए शतक लगाने वाले रचिन रवींद्र दुनिया के तीसरे सबसे युवा खिलाड़ी बन गए थे।
रचिन को इस रिकॉर्ड को बनाने में 23 साल 321 दिन लगे थे।


