रतन टाटा (Ratan Tata) आज हमारे बीच नहीं हैं। अपनी विनम्रता और सादगी के लिए मशहूर रतन टाटा की ज़िंदगी के किस्से हमारे बीच जरूर हैं।
टाटा ग्रुप आज देश ही नहीं, दुनिया में ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में एक बड़ा नाम है। इस ग्रुप ने महंगी से महंगी कारें बनाईं तो सबसे सस्ती कार भी इसी ग्रुप की देन है।
और इसके शिल्पकार थे रतन टाटा (Ratan Tata)। रतन टाटा की सोच में आम इंसान के लिए काफी जगह थी।
रतन टाटा (Ratan Tata) ने एक बार मुंबई की तेज बारिश में स्कूटर पर सवार चार लोगों के एक परिवार को भीगते देखा। यह दृश्य उनके जेहन में हमेशा के लिए बस गया।
इस घटना ने रतन टाटा को एक ऐसी कार के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया, जो आम आदमी की पहुंच में हो। इस आइडिया ने पहले इंडिका और बाद में नैनो को जन्म दिया।
टाटा नैनो को लखटकिया कार के नाम से भी जाना जाता था क्योंकि यह कार करीब लाख रुपए के बजट में आ जाती थी।
रतन टाटा का सपना था कि एक दिन ऐसा आए कि देश के हर नागरिक के पार अपनी कार हो।
2022 में रतन टाटा ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में टाटा नैनो के बारे में बात की थी और कहा था कि कंपनी शुरू में सोच रही थी कि दोपहिया वाहनों को कैसे सुरक्षित बनाया जाए, लेकिन आखिरकार कार के डिजाइन पर काम करने का फैसला किया।
हालाँकि, यह फैसला टाटा मोटर्स की उम्मीद के मुताबिक बड़ी सफलता की कहानी नहीं बन पाया। लेकिन, रतन टाटा कहते थे कि उन्हें अभी भी कार पर गर्व है।


