‘सक्सेस इज़ द बेस्ट रिवेंज यानी आपकी बड़ी कामयाबी ही किसी से बदला लेने का सबसे अच्छा तरीका है। जाने-माने अमेरिकी गायक और अभिनेता फ्रैंक सिनात्रा की ये बात शायद रतन टाटा (Ratan Tata) पर सबसे ज़्यादा लागू होती है।
एक घटना के बाद रतन टाटा (Ratan Tata) ने अपने नए कार डिवीजन को अमेरिकी कंपनी फोर्ड को नहीं बेचने का फ़ैसला लिया था। शायद यही वजह है कि आज टाटा मोटर्स दुनिया की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनी बनी है।
दशकों बाद टाटा ने फोर्ड के प्रतिष्ठित ब्रांड – जगुआर और लैंड रोवर – का अधिग्रहण किया, जो बिजनेस की दुनिया में सबसे बेहतरीन असफलता से सफलता में बदल जाने वाले क्षणों में से एक है।
हालांकि, इस कामयाबी के पीछे रतन टाटा (Ratan Tata) के साथ हुई एक घटना की कहानी छिपी है। एक वक़्त रतन टाटा को अपमान झेलना पड़ा था जब वो फोर्ड के तत्कालीन चेयरमैन बिल फोर्ड से मिलने डेट्रायट गए थे।
दस साल बाद, टाटा ने अपना बदला लिया और 2.3 बिलियन डॉलर में जगुआर और लैंड रोवर का अधिग्रहण किया।
क्या है पूरी कहानी?
साल 1998 में टाटा मोटर्स ने अपनी पहली कार इंडिका लॉन्च की थी। उस वक़्त टाटा मोटर्स को टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी के नाम से जाना जाता था। यह एक ऐतिहासिक पल था क्योंकि यह देश की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित कार थी।
इंडिका कार रतन टाटा (Ratan Tata) के दिल के बहुत करीब थी। उन्होंने खुद असेंबली लाइन से पहली इंडिका को चलाया था। इंडिका के ज़रिए रतन टाटा बाज़ार में छाई जापानी और अमेरिकी कारों से निपटना चाहते थे।
दुर्भाग्यवश, इंडिका कार सफल नहीं हो पाई और कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा। रतन टाटा (Ratan Tata) इतने निराश हो गए कि उस वक़्त उन्होंने अपना कार बिजनेस बेचने का फैसला किया। 1999 में टाटा ने एक सौदे के लिए फोर्ड मोटर्स से संपर्क किया। रतन टाटा खुद फोर्ड के चेयरमैन बिल फोर्ड से मिलने डेट्रायट गए।
मीटिंग के दौरान, फोर्ड ने रतन टाटा को यह कहकर अपमानित किया कि जब उन्हें कारों के निर्माण के बारे में कुछ भी पता नहीं था उन्हें टाटा मोटर्स शुरू ही नहीं करना चाहिए था।
इस घटना को याद करते हुए रतन टाटा (Ratan Tata) ने कहा था, “उन्होंने हमसे कहा, आपको पैसेंजर कारों के बारे में कुछ भी नहीं पता है, आपने कार का बिजनेस क्यों शुरू किया? हम आपकी कार डिवीजन खरीदकर आपके ऊपर एहसान कर रहे हैं।”
चुभ गई थी फोर्ड वालों की बात
यही बात रतन टाटा को चुभ गई थी। कभी हार न मानने वाले रवैये के लिए मशहूर रहे रतन टाटा ने इस मीटिंग के बाद कार डिवीजन को नहीं बेचने का फैसला किया। उन्होंने टाटा मोटर्स को बदलने और इंडिका मॉडल को बेहतर बनाने के लिए दिन-रात एक कर दिया। कार का एक नया मॉडल लॉन्च किया गया और यह लोगों के बीच हिट हो गया। यह टाटा की सबसे ज़्यादा बिकने वाली कारों में से एक बन गई।
नौ साल बाद रतन टाटा का समय आया। 2008 की ‘महामंदी’ का फोर्ड पर बुरी तरह असर पड़ा और यह कंपनी दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई।
हालात बदल गए और रतन टाटा ने जगुआर और लैंड रोवर खरीदने की पेशकश की। जून 2008 में टाटा मोटर्स ने फोर्ड से इन brands को खरीदने के लिए 2.3 बिलियन डॉलर का नकद सौदा किया।
कहा जाता है कि तब फोर्ड के चेयरमैन ने रतन टाटा का शुक्रिया अदा करते हुए कहा था कि ‘जगुआर और लैंड रोवर खरीदकर आप हमारे ऊपर पर बहुत बड़ा एहसान कर रहे हैं।


