टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा (Ratan Tata) का 86 वर्ष की उम्र में 9 अक्टूबर को निधन हो गया है। उनके निधन से पूरे देश में शोक का माहौल है।
अरबपति होने के बावजूद भी रतन टाटा सादा जीवन जीने के लिए जाने जाते थे। रतन टाटा जानवरों के प्रति प्रेम और दया के लिए जाने जाते थे। रतन टाटा (Ratan Tata) को आवारा कुत्तों से विशेष रूप से करुणा थी। उनके जानवरों के प्रति प्रेम को टाटा ग्रुप के मुख्यालय में भी देखा जा सकता है।
टाटा ग्रुप का मुख्यालय, बॉम्बे हाउस, अन्य कॉर्पोरेट मुख्यालयों से काफी अलग है। अन्य कॉर्पोरेट बिल्डिंग की तरह यहां आवारा कुत्तों को भगाया नहीं जाता है। बल्कि बॉम्बे हाउस में उनका स्वागत किया जाता है। रतन टाटा (Ratan Tata) ने कुत्तों को परिसर में आने की अनुमति दी थी और साथ ही आवारा कुत्ते बॉम्बे हाउस में आराम से घूम सकते हैं। रतन टाटा ने यह प्रथा तब शुरू की जब उन्होंने मुंबई के भारी बारिश में एक आवारा कुत्ते को संघर्ष करते हुए देखा था।
रतन टाटा (Ratan Tata) ने साल 2018 में बॉम्बे हाउस में नवीनीकरण करवाकर कुत्ता-घर का निर्माण करवाया था। इस कुत्ता-घर में बाथिंग एरिया, बंक बेड, और जलवायु नियंत्रित पर्दे जैसे सुविधाएं मौजूद हैं। कुत्तों के आराम करने के लिए यह सुविधा की गई है।
रतन टाटा (Ratan Tata) का जानवरों के प्रति स्नेह का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि साल 2018 में जब उन्हें यूके के बकिंघम पैलेस में एक पुरस्कार देने के लिए आमंत्रित किया गया था। रतन टाटा अपने पालतू कुत्ते की तबीयत खराब होने के कारण पुरस्कार लेने यूके नहीं गए थे। उनके करीबी दोस्त सुहेल सेठ ने बताया कि टाटा ने कहा, “मेरा कुत्ता बहुत बीमार हैं, मैं उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकता।” जब यूके के किंग चार्ल्स को यह बात मालूम चली तो उन्होंने रतन टाटा की खूब प्रशंसा की थी। किंग चार्ल्स ने कहा था कि वो एक सच्चे इंसान हैं। रतन एक नेक दिल इंसान हैं।
रतन टाटा ने केवल अपने पालतू जानवरों के लिए नहीं, बल्कि सभी जानवरों के लिए कार्य किए हैं। उन्होंने साल 2023 में मुंबई में भारत का पहला स्मॉल एनिमल अस्पताल खोला था। यह एक अत्याधुनिक अस्पताल है, जो 98,000 वर्ग फुट में फैला हुआ है और इसमें ICU, सीटी स्कैन, और एक्स-रे जैसी सुविधाएं उपल्बध हैं। यह अस्पताल 24×7 आपातकालीन सेवा प्रदान करता है। रतन टाटा ने अस्पताल में एक हिस्सा आवारा कुत्तों के लिए बनवाया है। जिसके कारण बिना घर के जानवरों को भी उचित देखभाल मिल सके। यह रतन टाटा की दानशीलता और उनके जानवरों के प्रति प्रेम को दर्शाता है।
रतन टाटा के दुनिया छोड़ने के बाद उनकी विरासत न केवल औद्योगिक क्षेत्र में बल्कि जानवरों की देखभाल के क्षेत्र में भी जीवित रहेगी। रतन टाटा ने लोगों के सामने एक ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है जो आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।


