दिल्ली पुलिस ने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को सिंघु बॉर्डर से हिरासत में ले लिया है। इस घटना के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर इस घटना की जानकारी दी। वांगचुक ने बताया कि सोमवार रात उन्हें उस समय हिरासत में लिया गया जब वह गांधी समाधि की ओर मार्च निकालने जा रहे थे।
दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) और लद्दाख के नेताओं को दिल्ली में प्रवेश करने से रोक दिया है। कई नेताओं और सदस्यों को हिरासत में लिया गया है।
सोनम वांगचुक की ‘दिल्ली चलो पदयात्रा’ 1 सितंबर को लेह से शुरू हुई थी और आज (मंगलवार) शाम को दिल्ली पहुंचने वाली थी।
सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) के नेतृत्व में यह मार्च 2 अक्टूबर को राजघाट पर समाप्त होना था। लेकिन इससे पहले ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया है। दिल्ली की सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया ‘X’ पर लिखा है- ‘पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्वक मार्च कर रहे सोनम वांगचुक और लद्दाख के लोगों को हिरासत में लेना अस्वीकार्य है।”
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को निशाने पर लिया और कहा है कि किसानों की तरह ये चक्रव्यूह भी टूटेगा और मोदी का अहंकार भी टूटेगा।
दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी और आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने भी सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) के समर्थन में बयान दिए हैं।
आतिशी ने ट्वीट कर लिखा -‘सोनम वांगचुक और हमारे 150 लद्दाखी भाई-बहन शांतिपूर्ण तरीक़े से दिल्ली आ रहे थे। उनको पुलिस ने रोक लिया है। कल रात से बवाना थाने में क़ैद हैं। क्या लद्दाख के लोकतांत्रिक अधिकार माँगना ग़लत है? क्या 2 अक्तूबर को सत्याग्रहियों का गांधी समाधि जाना ग़लत है? सोनम वांगचुक जी को रोकना तानाशाही है’।
मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज ने क्या कहा?
सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की हिरासत पर दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और AAP नेता मनीष सिसोदिया ने कहा, “मुझे नहीं पता कि प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और भाजपा क्या कर रहे हैं। वे गैंगस्टरों को नहीं पकड़ रहे हैं, क्योंकि भाजपा ने उन्हें पूर्ण संरक्षण दे रखा है…लेकिन सोनम वांगचुक जैसे लोग जो देश के मुद्दों को उठाते हैं, अगर वे पदयात्रा करना चाहते हैं तो उनके साथ आतंकवादियों जैसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है?…”
सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की हिरासत पर दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा, “लोग सोनम वांगचुक जैसे लोगों से प्रेरणा लेते हैं क्योंकि उन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया है। अगर कोई व्यक्ति लद्दाख के कुछ मुद्दों को उठाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आ रहा है, जो एक संवेदनशील क्षेत्र है, तो यह बहुत बुरा है कि केंद्र सरकार ने दिल्ली में कर्फ्यू लगा दिया है और कहा है कि अगले कुछ दिनों तक दिल्ली में पाँच से अधिक लोग इकट्ठा नहीं हो सकते। 3 नवंबर से दिल्ली में नवरात्रि, रामलीला शुरू हो जाएगी और वे कह रहे हैं कि दिल्ली में पाँच से अधिक लोग इकट्ठा नहीं हो सकते। अगर दिल्ली के एलजी में हिम्मत है तो उन्हें दिखाना चाहिए कि वह हमें कैसे रोक सकते हैं?…”
दिल्ली में सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की हिरासत के खिलाफ कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) और एपेक्स बॉडी लेह (एबीएल) ने मंगलवार को लद्दाख बंद का आह्वान किया है।
सोनम वांगचुक कौन हैं?
1 सितंबर 1966 को लद्दाख के अलची में जन्में सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) एक शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता हैं। वो स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख के फाउंडर डायरेक्टर हैं।
1993 से 2005 तक वांगचुक ने लैंडेग्स मेलॉग पत्रिका में काम किया है। ये लद्दाख की एकमात्र प्रिंटिंग पत्रिका है। उन्होंने यहां संपादक के रूप में काम किया था। मैकेनिकल इंजीनियर वांगचुक 30 साल से ज्यादा वक्त से शिक्षा के सुधार के लिए काम कर रहे हैं।
बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान की मशहूर फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ सोनम वांगचुक के जीवन से प्रेरित थी। इस फिल्म के बाद वह (Sonam Wangchuk) चर्चा में आए।
एनआईटी श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले सोनम वांगचुक शिक्षा में सुधार और लद्दाख तथा देश के विकास के लिए काम कर रहे हैं। वांगचुक ने कई आविष्कार किए हैं, जिनमें सोलर हीटेड मिलिट्री टेंट, आर्टिफिशियल ग्लेशियर और SECMOL परिसर का डिज़ाइन शामिल हैं।
क्या हैं सोनम वांगचुक की मांगें
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद राज्य को दो हिस्सों में बांट दिया गया, जिसमें लद्दाख को बिना विधानसभा के केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया। इससे वहां का विशेष दर्जा खत्म हो गया।
केंद्र शासित प्रदेश के निर्माण ने उन्हें विधायिका के बिना ही छोड़ दिया था। आंदोलन करने वालों की मांग है कि लद्दाख के लोगों को सरकारी नौकरी मिले, लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल किया जाए, साथ ही पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जाए।
इसको लेकर लद्दाख के लोग 2019 से ही मांग कर रहे हैं। और उसका नेतृत्व सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) कर रहे हैं। वांगचुक इससे पहले भी मार्च में 21 दिनों तक भूख हड़ताल कर चुके हैं.
बीजेपी ने साल 2019 के अपने चुनावी घोषणापत्र में और बीते वर्ष लद्दाख हिल काउंसिल चुनाव में भी लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने का वादा किया था। इसको लेकर भी लोगों में नाराजगी है। इस आंदोलन को लेकर सोनम वांगचुक की केंद्र सरकार से बातचीत भी चल रही थी लेकिन वह विफल हो गई थी।


