Supreme Court ने बुधवार को बुलडोजर एक्शन पर बड़ा फैसला सुनाया है।
बुलडोजर एक्शन पर Supreme Court ने योगी सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में हुए बुलडोजर एक्शन पर कड़ी आपत्ति जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित को 25 लाख का मुआवजा देने को कहा है। आपको बता दें कि यह मामला महाराजगंज जिले का है। महाराजगंज जिले के वार्ड नंबर 16 मोहल्ला हामिदनगर में सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के लिए घरों को बुलडोजर के जरिए ध्वस्त कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था।
पीड़ित को 25 लाख का मुआवजा दें- Supreme Court
फैसला सुनाते हुए सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि घर तोड़ने में किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूपी सरकार ने खुद हलफनामा देकर कहा है कि इस मामले में कोई नोटिस नहीं दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर नाराजगी जाहिर की। सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यूपी सरकार की ओर से कहा गया कि सिर्फ 3.6 वर्ग मीटर का अतिक्रमण था।
सरकार की ओर से इसका कोई प्रमाण नहीं दिया गया। बिना नोटिस दिए आप किसी का घर कैसे तोड़ सकते हैं। किसी के भी घर में घुसना अराजकता है। सीजेआई ने कहा कि सरकार पीड़ित को 25 लाख रुपए का मुआवजा दें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह पूरी तरह से मनमानी है। जस्टिस जेबी पारदीवाल ने कहा कि आपके यह कहने का आधार क्या है कि यह अनाधिकृत था, आपने 1960 से क्या किया? पिछले 50 साल से क्या कर रहे थे?
परिवार को घर खाली करने का समय नहीं दिया- Supreme Court
Supreme Court ने सुनवाई के दौरान यूपी सरकार को फटकारते हुए कहा कि आपके अधिकारी ने पिछली रात सड़क चौड़ीकरण के लिए पीला निशान लगा दिया था। अगले दिन सुबह आप बुलडोजर लेकर आ गए, आपने परिवार को घर खाली करने का समय भी नहीं दिया। इस मामले में सड़क चौड़ीकरण तो सिर्फ एक बहाना नजर आता है।
सीजीआई ने कहा कि यूपी सरकार ने NH की मूल चौड़ाई दर्शाने के लिए कोई दस्तावेज पेश नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को फटकारते हुए कहा कि NHRC की रिपोर्ट बताती है कि तोड़ा गया हिस्सा 3.75 मीटर से कहीं अधिक था।


