Supreme Court ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे पर शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया।
Supreme Court ने AMU को अल्पसंख्यक संस्थान के रूप में मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 7 जजों की पीठ ने 1967 के अजीज बाशा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के फैसले को पलट दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कोई संस्थान केवल इस कारण अल्पसंख्यक दर्जा नहीं खो सकता क्योंकि उसे एक विधि द्वारा स्थापित किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
आपको बता दें कि साल 1967 में अजीज बाशा केस में सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा नहीं दिया था। उस वक्त 5 जजों की बेंच ने कहा था कि AMU को एक विशेष अधिनियम के तहत स्थापित किया गया है। इसलिए अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा नहीं दिया जा सकता है। पीठ ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय अधिनियम 1920 का हवाला दिया था।
Supreme Court ने 4-3 से पलटा पुराना फैसला
आज Supreme Court ने अपने पुराने फैसले को पलट दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 4-3 के बहुमत से अपना पुराना फैसला पलटा है। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने इस फैसले की घोषणा अपने कार्यकाल के अंतिम दिन किया। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा ने इस फैसले का समर्थन किया। जबकि न्यायमूर्ति सूर्याकांत, दीपांकर दत्ता और एससी शर्मा ने असहमति जताई।
Supreme Court ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण नहीं है कि एक संस्थान को एक अधिनियम से स्थापित किया गया है। बल्कि यह देखा जाए कि उस संस्थान की स्थापना किस समुदाय ने की थी और उसके पीछे क्या वजह थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर तथ्य यह दर्शाता है कि संस्थान की स्थापना किसी अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा की गई थी। तो वह संस्थान संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा प्राप्त कर सकता है।
3 जजों की बेंच तय करेगी अल्पसंख्यक दर्जा
Supreme Court ने AMU के अल्पसंख्यक दर्जे का निर्णय करने के लिए 3 जजों की एक पीठ के पास भेज दिया है। तीन बेंच की पीठ यह तय करेगा कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को वास्तव में अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा मिलना चाहिए या नहीं। इस फैसले के बाद, विश्वविद्यालय को लेकर जारी विवाद का समाधान मिल सकेगा।
Supreme Court के इस महत्वपूर्ण फैसले का असर न केवल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पर, बल्कि देश के अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों को लेकर चल रहे कानूनी विवादों पर भी पड़ेगा।
सर सैयद ने की थी AMU की स्थापना
आपको बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना 1875 में सर सैयद अहमद खान ने की थी। इसकी शुरुआत अलीगढ़ मुस्लिम कॉलेज के रूप में की गई थी। इस संस्थान को मुसलमानों के शैक्षिक उत्थान के लिए बनाया गया था। साल 1920 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया था।


