बिहार में 70 वीं BPSC परीक्षा के नोटिफिकेशन जारी होने के बाद से ही बवाल मचा हुआ है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने भी इस मुद्दे को लेकर नीतीश कुमार पर निशाना साधा है।
Tejashwi Yadav ने 70 वीं बीपीएससी परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आयोग को इस मूल्यांकन प्रक्रिया पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत करना चाहिए।
छात्रों के साथ मिलकर कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ेंगे- Tejashwi Yadav
गुरुवार को Tejashwi Yadav ने सोशल मीडिया पर जारी बयान कर कहा कि अगर नीतीश सरकार अभ्यर्थियों की मांगों पर विचार नहीं किया तो हम आंदोलनकारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनकी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने आगे कहा कि एनडीए सरकार छात्रों के भविष्य और सपनों के साथ खिलवाड़ बंद करें।
Tejashwi Yadav ने नीतीश कुमार को लिखा पत्र
Tejashwi Yadav ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस मुद्दे पर पत्र लिखकर त्वरित समाधान की मांग की है। तेजस्वी यादव ने पत्र के माध्यम से 4 मांग रखी है-
1. परीक्षा फॉर्म भरने के लिए अभ्यर्थियों को 5 अतिरिक्त दिन दिए जाएं, ताकि आयोग की नाकामी अथवा सर्वर की खामी के कारण जो अभ्यर्थी फॉर्म नहीं भर सके, वो फॉर्म भर पाएं।
2. आयोग 70वीं BPSC की प्रारंभिक परीक्षा की तिथि को आगे बढ़ाएं, ताकि अभ्यर्थियों को पर्याप्त समय मिल सके।
3. नॉर्मलाइजेशन पर अपनी नीति साफ की जाए। उचित होगा कि सामान्यीकरण की विवादित और अन्यायपूर्ण प्रक्रिया से बचा जाए।
4. हमारी मांग है कि परीक्षा एक दिन, एक शिफ्ट, एक पेपर और एक पैर्टन में बिना लीक के हो।
एक दिन, एक शिफ्ट, एक पेपर, एक पैटर्न में हो परीक्षा- Tejashwi Yadav
Tejashwi Yadav ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 70 वीं BPSC परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन की आकलन पद्धति पर आयोग अपना मंतव्य स्पष्ट करें। छात्र विरोधी NDA सरकार से हमारी मांग है कि परीक्षा एक दिन, एक शिफ्ट, एक पेपर, एक पैटर्न में बिना पेपर लीक हो।
आयोग को अभ्यार्थियों की इस समस्या एवं मांग का संज्ञान अवश्य लेना चाहिए। तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि फॉर्म भरने की आखिरी तिथि से 2-3 पूर्व में सर्वर के ठीक से कार्य नहीं करने के कारण लाखों विद्यार्थी फॉर्म भरने से वंचित रह गए थे।
परसेंटाइल और नॉर्मलाइजेशन पद्धति से होगा पेपर लीक- BPSC
BPSC की 70वीं संयुक्त परीक्षा में परसेंटाइल और नॉर्मलाइजेशन लागू करने का निर्णय लिया गया है। छात्रों ने नियम का विरोध किया है। छात्रों का कहना है कि इस व्यवस्था को किसी भी हाल में भी स्वीकार नहीं किया जा सकता है। BPSC का कहना है कि परसेंटाइल और नॉर्मलाइजेशन पद्धति से पेपर लीक को रोका जा सकेगा। इस पद्धति के तहत आयोग अलग-अलग सेट के प्रश्न पत्र होना चाहिए, ताकि सभी उम्मीदवारों को समान अवसर मिले। उनका तर्क है कि अगर अलग-अलग सेट में प्रश्न पत्र होंगे तो कुछ सेट में कठिन सवाल होंगे, वहीं कुछ में सरल सवाल। इससे परीक्षा के निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।
क्या होता है नॉर्मलाइजेशन?
आपको बता दें कि नॉर्मलाइजेशन एक प्रक्रिया है। जिसके जरिए किसी भी परीक्षा में मिले अंकों को सामान्य किया जाता है। यह प्रक्रिया तब अपनाई जाती है, जब एक से ज्यादा पालियों में परीक्षा आयोजित की जाती है। नॉर्मलाइजेशन की मदद से परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर कैंडिडेट्स का प्रतिशत स्कोर निकाला जाता है।


