ट्रेकोमा (Trachoma) नाम की बीमारी अब भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या नहीं रही। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस बात का ऐलान कर दिया है कि भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में ट्रैकोमा को खत्म कर दिया है।
भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला दक्षिण-पूर्व एशिया का तीसरा देश बन गया है। इससे पहले नेपाल और म्यांमार ने इस मामले में कामयाबी हासिल की है।
ट्रेकोमा (Trachoma) बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है जो आँखों को प्रभावित करता है। यह क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस (Chlamydia Trachomatis) नाम के बैक्टीरिया के चलते होता है।
ट्रेकोमा संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित लोगों की आँखों, पलकों, नाक या गले के स्राव के संपर्क में आने से फैलती है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो यह अंधेपन का कारण बनता है।
WHO ने (Trachoma) को एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग करार दिया है। डब्ल्यूएचओ के अनुमान बताते हैं कि दुनिया भर में 150 मिलियन लोग ट्रेकोमा से प्रभावित हैं और उनमें से 6 मिलियन अंधे हैं या उन्हें दृष्टि संबंधी जटिलताओं का खतरा है। ट्रेकोमा खराब पर्यावरणीय परिस्थितियों में रहने वाले वंचित समुदायों में पाया जाता है।
कभी देश में अंधेपन की बड़ी वजह था ट्रेकोमा
1950-60 के दौरान ट्रेकोमा देश में अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक था। भारत सरकार ने 1963 में राष्ट्रीय ट्रेकोमा नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया और बाद में ट्रेकोमा नियंत्रण प्रयासों को भारत के राष्ट्रीय अंधेपन नियंत्रण कार्यक्रम (NPCB) में एकीकृत कर दिया गया।
1971 में ट्रेकोमा (Trachoma) के कारण अंधेपन की दर 5% थी और आज यह घटकर 1% से भी कम रह गई है। WHO SAFE रणनीति को पूरे देश में लागू किया गया, जिसमें SAFE का मतलब है सर्जरी, एंटीबायोटिक्स, चेहरे की स्वच्छता, पर्यावरण की सफाई आदि को अपनाना। परिणामस्वरूप, 2017 में भारत को संक्रामक ट्रेकोमा से मुक्त घोषित कर दिया गया। हालाँकि, 2019 से 2024 तक भारत के सभी जिलों में ट्रेकोमा के मामलों की निगरानी जारी रही।
NPCBVI के तहत 2021-24 तक देश के 200 जिलों में राष्ट्रीय ट्रैकोमैटस ट्राइकियासिस सर्वे भी किया गया, जो डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित एक आदेश था ताकि यह घोषित किया जा सके कि भारत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में ट्रैकोमा को समाप्त कर दिया है।
आखिरकार, ट्रेकोमा (Trachoma) के खिलाफ सालों की लड़ाई के बाद डब्ल्यूएचओ ने घोषणा की कि भारत ने ट्रेकोमा को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त कर दिया है। WHO के प्रतिनिधियों ने केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक आराधना पटनायक को आधिकारिक प्रमाण पत्र सौंपा।


