उत्तराखंड (Uttarakhand) की केदारनाथ विधानसभा सीट पर 20 नवंबर को उपचुनाव होने हैं। इस उपचुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
केदारनाथ विधानसभा सीट बीजेपी की झोली में डालने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद मोर्चा संभाल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने हाल में एक चुनावी सभा में कहा कि पिछले तीन साल से निरंतर केदारनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। इससे इलाके में करोड़ों का बिजनेस हुआ है और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुले हैं।
सीएम ने भरोसा जताया कि डबल इंजन सरकार के काम के बूते उपचुनाव में यहां की जनता बीजेपी को रिकॉर्ड मतों से विजयी बनाएगी। धामी ने कांग्रेस पर क्षेत्र और प्रदेश की भावना को आहत करने और विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया।
सीएम धामी ने कहा कि कांग्रेस की सोच सनातन संस्कृति के विरोध में रही है। जब-जब उत्तराखंड पर संकट आया, तब कांग्रेस ने केवल राजनीति की और लोगों को भ्रमित करने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों में केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास कार्य किए गए हैं।
दूसरी तरफ, कांग्रेस की ओर से प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा राज्य सरकार पर केदारनाथ की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं। माहरा का आरोप है कि यहां बीजेपी के कुशासन से जनता परेशान है। उन्होंने कहा कि बीते दो-तीन साल में केदारनाथ और चारधाम यात्रा को बीजेपी ने बर्बाद किया है।
रोजगार का मुद्दा
आपको बता दें कि केदारनाथ में रोजगार का मुद्दा सबसे अहम है। केदारनाथ की यात्रा भी मुख्य मुद्दों में से एक है क्योंकि यहां के लोगों के लिए यह रोजगार का जरिया भी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि राज्य सरकार 2025 तक डेढ़ लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है।
सीएम ने दावा किया कि पिछले तीन साल के दौरान स्वरोजगार के क्षेत्र में कई काम हुए हैं। किसी भी काम के शुरुआत में कठिनाई तो आती ही है। लेकिन, अब महिलाएं और युवा स्वरोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने लगे हैं। सरकार की विभिन्न योजनाओं के चलते अब तक प्रदेश में एक लाख से अधिक महिलाएं लखपति बन चुकी हैं।
पलायन का मुद्दा
बात उत्तराखंड (Uttarakhand) के मुद्दों की करें तो राज्य के पहाड़ी इलाकों से हो रहा पलायन भी बड़ा मुद्दा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार इस मुद्दे से निपटने के लिए लगातार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री का कहना कि सरकार साल 2025 तक उत्तराखंड (Uttarakhand) को श्रेष्ठ राज्यों की श्रेणी में लाने के लक्ष्य पर काम कर रही है। पलायन निवारण आयोग ने जो सुझाव दिए हैं उन्हें अमल में लाने के लिए संबंधित विभागों के जरिए ठोस कार्य योजना बनाई जा रही है।
सीएम का कहना है कि जन-कल्याणकारी योजनाओं से ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाभान्वित करने के लिए प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन को रोकने के लिए कई योजनाओं को लागू किया है। इसके तहत गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं। देश-विदेश के प्रवासियों को भी इस मुहिम से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
UCC पर कहां पहुंची सरकार?
उत्तराखंड (Uttarakhand) में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर सियासी घमासान जारी है। यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। बीजेपी का कहना है कि राज्य में जल्द ही यूसीसी को लागू किया जाएगा।
यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए नियमावली का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। नियमावली बनने के बाद सरकार इसे लागू करने की तैयारी में है। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार यूसीसी के नाम पर राज्य की जनता को बेवकूफ बना रही है।
राज्य के स्थापना दिवस के दिन धामी सरकार ने वादा किया था कि उत्तराखंड (Uttarakhand) की जनता को यूसीसी की सौगात देंगे। ऐसे में धामी सरकार यूसीसी को क्यों नहीं ला पाई, इससे अब कई सवाल उठने लगे हैं।
आपको बता दें कि हर साल 9 नवंबर को ‘उत्तराखंड स्थापना दिवस’ मनाया जाता है। इस साल उत्तराखंड (Uttarakhand) के स्थापना दिवस पर देवभूमि रजतोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मौके पर उत्तराखंड (Uttarakhand) की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में उत्तराखंड हर क्षेत्र में सफलता के नए प्रतिमान गढ़ रहा है। आज उत्तराखंड कृषि, बागवानी और उद्योग समेत सभी क्षेत्रों में विकास की नई इबारत लिख रहा है। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
सीएम ने दावा किया कि राज्य में बड़े पैमाने पर युवाओं के लिए नौकरियों के अवसर पैदा हो रहे हैं। उत्तराखंड (Uttarakhand) सरकार ने औद्योगिक नीति, लॉजिस्टिक नीति, स्टार्टअप नीति सहित अनेक नीतियां बनाकर राज्य में निवेश के अवसर को बढ़ाने का काम किया है।
सड़क हादसों पर कब लगेगी लगाम?
राज्य (Uttarakhand) में आए दिन सड़क हादसे होते रहते हैं। हाल ही में अल्मोड़ा में हुए बस हादसे में कई लोगों की जानें चली गईं थी। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य भर में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या पर लगाम लगाने के लिए सड़क सुरक्षा मैनुअल तैयार करने के लिए एक समिति गठित करने का निर्देश दिया है। उन्होंने इस समिति में विशेषज्ञों और अनुभवी लोगों को शामिल करने को कहा है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने हाल ही में सीमा सड़क संगठन द्वारा निर्मित 75 प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया। इसमें 9 परियोजनाएं उत्तराखंड (Uttarakhand) की हैं। मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि बुनियादी ढांचे की ये परियोजनाएं विशेष रूप से दूरदराज और वंचित क्षेत्रों के उत्थान के लिए काफी सहायक होंगी।
मुख्यमंत्री का कहना है कि नए पुल बनने से राज्य में कनेक्टिविटी में काफी सुधार होगा। यात्रा के समय में कमी आएगी। इससे हम धार्मिक और सामान्य पर्यटन के साथ ही सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे और उत्तराखंड को एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करेंगे।


