सोशल मीडिया पर एक संदेश वायरल हो रहा है जिसमें बताया गया है कि मोदी सरकार ने वंदे भारत (Vande Bharat) स्लीपर ट्रेन बनाने के लिए 58000 करोड़ रुपए के अनुबंध में संशोधन किया है और इस फैसले से एक ट्रेन की कीमत पहले की तुलना में दोगुनी बढ़ गई है।
इसमें यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि वो कौन सा कॉन्ट्रैक्टर है जिसे सरकार फायदा पहुंचाने के लिए वंदे भारत के लिए 50 फीसदी ज्यादा खर्च कर रही है।
तृणमूल काँग्रेस से राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने इस संदेश के साथ एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने दावा किया कि सरकार ने वंदे भारत (Vande Bharat) ट्रेनों के अनुबंध की लागत में 50 फीसदी का इजाफा किया है।
गोखले ने यह भी लिखा कि पहले जिस ट्रेन की लागत 290 करोड़ रुपए थी, अब उसकी लागत 436 करोड़ रुपए होगी। उन्होंने लिखा कि यह केवल AC कोच वाली ट्रेन होगी, जिससे गरीब लोग सफर नहीं कर सकते।
सांसद ने आगे पूछा, ‘वंदे भारत के अनुबंध में 50% लागत वृद्धि से किसे फायदा हो रहा है।
भारतीय रेलवे ने वंदे भारत (Vande Bharat) ट्रेनों की लागत को लेकर सफाई दी है। रेलवे ने सांसद साकेत गोखले को कहा है कि वो वंदे भारत की लागत को लेकर गलत सूचना और फर्जी खबर ना फैलाएं।
भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेकिंग यूनिट ने भी वंदे भारत (Vande Bharat) को लेकर ऐसे ट्वीट को गुमराह करने वाला बताया है।
PIB फैक्ट चेक का यह भी कहना है कि लागत में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की बात गलत है। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए डिब्बों की संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर दी गई है।
कहा गया है कि असलियत में कॉन्ट्रैक्ट की कीमत बढ़ी नहीं बल्कि घटी है क्योंकि ट्रेन की लंबाई बढ़ा दी गई है।


