रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने 3 और 4 अक्टूबर को राजस्थान के पोखरण में अत्याधुनिक चौथी पीढ़ी के मिनी वेरिशॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) के तीन सफल परीक्षण किए।
इन परीक्षणों में तेज रफ्तार वाले टारगेट के खिलाफ मिसाइलों को टेस्ट किया गया है। जिसमें अधिकतम सीमा और अधिकतम ऊंचाई पर टारगेट्स को इंटरसेप्ट कर नष्ट करना है। इस टेस्ट ने कई तरह के टारगेट्स को निशाना बनाने में इस हथियार प्रणाली की हिट-टू-किल क्षमता को प्रदर्शित किया है।
VSHORADS मिसाइलों का विकास पूरा हो चुका है और दो प्रोडक्शन एजेंसियों को विकास से लेकर उत्पादन तक साझेदार (DcPP) के रूप में शामिल किया गया है। इन टेस्ट में DcPP के माध्यम से निर्मित मिसाइलों का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है।
VSHORADS एक मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम है। इसो रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने अन्य DRDO प्रयोगशालाओं और DcPPs के सहयोग से भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है। तीनों भारतीय सेनाएं ने इस परियोजना से शुरुआत से ही जुड़ी हुई हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, सशस्त्र बलों और उद्योग को सफल विकासात्मक परीक्षणों के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह नई मिसाइल आधुनिक तकनीकों से लैस है और यह वायु सुरक्षा के खिलाफ सेना को और अधिक तकनीकी मजबूती प्रदान करेगी।
DRDO के अध्यक्ष और रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव समीर वी. कामत ने भी DRDO की टीम, उद्योग साझेदारों और उपयोगकर्ताओं को सफल उड़ान परीक्षणों के लिए बधाई दी है। ये मिसाइलें पिछले कुछ वर्षों से विकासाधीन थीं और उम्मीद की जा रही है कि ये सुरक्षा बल की आवश्यकताओं को पूरा करेंगी। VSHORADS खासकर दुश्मन के विमानों, ड्रोन और अन्य हवाई लक्ष्यों को संक्षिप्त रेंज में नष्ट करने की क्षमता रखती है।


