Paralympics Medal for India: पेरिस में जारी पैरालंपिक्स खेलों (Paris Paralympics 2024) में भारत के पैरा शटलर नीतेश कुमार (Nitesh Kumar) ने गोल्ड मेडल (Gold Medal) जीत लिया है।
नीतेश कुमार ने सोमवार को 80 मिनट तक चले फाइनल मुकाबले में ब्रिटेन के डेनियल बेथेल को हराया। यह भारत का मौजूदा खेलों का 9वां पदक है, जबकि दूसरा गोल्ड मेडल है।
इससे पहले महिलाओं की निशानेबाजी प्रतियोगिता में अवनी लेखरा (Avani Lekhara) ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया था।
नितेश से पहले भारत के योगेश कथुनिया (Yogesh Kathuniya) ने पुरुषों की डिस्कस थ्रो एफ-56 स्पर्धा में लगातार दूसरा पैरालंपिक रजत पदक (Silver Medal) जीता। नीतेश और योगेश दोनों ही हरियाणा के रहने वाले हैं।
पेरिस पैरालंपिक खेलों (Paris Paralympic Games) में पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी नीतेश कुमार ने गोल्ड मेडल हासिल कर भारत की झोली में दूसरा गोल्ड मेडल डाल दिया है। उन्होंने सोमवार को बैडमिंटन (Badminton) मेंस सिंग्लस एसएल3 स्पर्धा के फ़ाइनल में ब्रिटेन के बेथेल डैनियल को 21-14, 18-21, 23-21 से हराकर मेडल जीता।
पुरुष एकल एसएल3 कैटेगरी में विश्व में नंबर वन रैंक पर मौजूद नीतेश कुमार का जन्म 30 दिसंबर 1994 को हुआ था और वो हरियाणा के चरखी दादरी के रहने वाले हैं।
नीतेश ने आईआईटी मंडी (IIT Mandi) से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। नीतेश कुमार बचपन से फुटबॉल खेलते थे, लेकिन विशाखापट्टनम में 2009 में हुए कार एक्सीडेंट में उनका पैर स्थायी रूप से विकलांग हो गया था।
इसके बाद भी नीतेश कुमार ने हार नहीं मानी और बैडमिंटन खेलना शुरू किया। वो 2016 में फरीदाबाद में हुए पैरा नेशनल गेम में हरियाणा की ओर से खेले और उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता।
फिर नीतेश कुमार ने 2017 में बेंगलुरु में हुए इवेंट में मेंस सिंगल्स में सिल्वर और डबल इवेंट में ब्रॉन्ज हासिल किया।
नीतेश की उपलब्धियों पर एक नजर..
एशियन पैरा गेम्स (2022)- गोल्ड मेडल (मेंस डबल्स)
एशियन पैरा गेम्स (2022) -सिल्वर मेडल (मेंस सिंगल्स)
एशियन पैरा गेम्स (2022) – ब्रॉन्ज मेडल (एक्सडी)
एशियन पैरा गेम्स (2018)- ब्रॉन्ज मेडल (मेंस डबल्स)
वर्ल्ड चैंपियनशिप (2024) – ब्रॉन्ज मेडल (मेंस सिंगल्स)
वर्ल्ड चैंपियनशिप (2022)- सिल्वर मेडल (मेंस सिंगल्स)
वर्ल्ड चैंपियनशिप (2019)- सिल्वर मेडल (मेंस डबल्स)
नीतेश से पहले योगेश कथुनिया ने सोमवार को ही पेरिस पैरालंपिक में पुरुषों की डिस्कस थ्रो- एफ56 स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक में भी रजत पदक जीता था।
कथुनिया ने 42.22 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो दर्ज किया और रजत जीता। वहीं, ब्राजील के क्लॉडनी बतिस्ता डॉस सैंटोस ने 46.86 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ब्रॉन्ज मेडल कोंस्टैंटिनोस त्ज़ोनिस ने हासिल किया। योगेश कथुनिया ने 41.50 मीटर, 41.55 मीटर, 40.33 मीटर, 40.89 मीटर और 39.68 मीटर की दूरी तक थ्रो किया।
हरियाणा के बहादुरगढ़ से आने वाले कथूनिया 9 साल की उम्र से ही गिलियन-बर्रे सिंड्रोम का शिकार हो गए थे, जिसके कारण उन्हें लकवा पड़ गया था। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और उनकी मां ने उन्हें बहुत हौसला दिया।
2017 में अपने कॉलेज दिनों में कथूनिया ने डिस्कस थ्रो की ट्रेनिंग शुरू की थी और इसके बाद से ही वह लगातार इस गेम में भारत के लिए मेडल जीत रहे हैं।
कथुनिया का रजत पदक पेरिस पैरालंपिक खेलों में भारत का आठवां और एथलेटिक्स में चौथा पदक है। इससे पहले, निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप टी47 में रजत पदक और प्रीति पाल ने 100 मीटर और 200 मीटर टी35 वर्ग स्पर्धाओं में कांस्य पदक जीते थे।


