पेरिस में खेले जा रहे पैरालंपिक गेम्स (Paris Paralympics 2024) में भारत के जेवलिन स्टार सुमित अंतिल (Sumit Antil) ने गोल्ड मेडल (Gold Medal) जीत लिया है। पैरालंपिक खेलों में सुमित का यह लगातार दूसरा स्वर्ण पदक है। सुमित अंतिल ने टोक्यो पैरालंपिक गेम्स (Tokyo Paralympics 2020) में भी गोल्ड मेडल जीता था।
सोमवार रात खेले गए मुकाबले में सुमित ने रिकॉर्ड जेवलिन (javelin throw) फेंका और अपना ताज बचाने में कामयाब रहे। सुमित ने टोक्यो (Tokyo 2020) में 68.55 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता था और पैरालंपिक खेलों (Paralympics Games) में नया रिकॉर्ड बनाया था।
पेरिस में सुमित ने अपने पहले ही प्रयास में 69.11 मीटर भाला फेंककर टोक्यो का अपना रिकॉर्ड तोड़ दिया। फिर इस खिलाड़ी ने 70.59 मीटर भाला फेंककर एक बार फिर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया और बाकी प्रतिभागियों से बढ़त बना ली।
अंतिल का तीसरा थ्रो 66.66 मीटर का था और चौथा थ्रो गलत होने के कारण नहीं गिना गया। सुमित ने 5वें थ्रो में एक और शानदार थ्रो किया और 69.04 मीटर की दूरी तय करके लगभग यह सुनिश्चित कर दिया कि इस बार भी स्वर्ण पदक के हकदार वहीं होंगे।
श्रीलंका के दुलान कोडिथुवाक्कु (Dulan Kodithuwakku) ने 66.57 मीटर के थ्रो के साथ दूसरे नंबर पर रहे और मुकाबले का रजत पदक (Silver Medal) जीता। भारत के ही संदीप चौथे और संजय संदीप सरगर सातवें स्थान पर रहे। संदीप का सर्वश्रेष्ठ थ्रो 62.80 मीटर उनके तीसरे प्रयास में आया। संजय का सर्वश्रेष्ठ प्रयास 58.03 मीटर था जो उनका भी तीसरा प्रयास था।
सुमित के स्वर्ण पदक के साथ भारत के पदकों की संख्या 3 स्वर्ण, 5 रजत और 6 कांस्य सहित 14 हो गई है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सुमित अंतिल को उनकी इस कामयाबी पर बधाई देते हुए सुमित के पेरिस में मुकाबले का वीडियो शेयर किया है। हालांकि, सुमित की इस कामयाबी के पीछे उनके संघर्ष की लंबी दास्तान है। आइए जानते हैं-
बचपन में पिता को खोया
7 जून 1998 को हरियाणा के सोनीपत में जन्मे सुमित ने बचपन में ही पिता को खो दिया था। सुमित के पिता रामकुमार एयरफोर्स में थे जिनकी बीमारी के चलते मौत हो गई। सुमित तीन बहनों में इकलौते भाई हैं। सिर से पिता का साया उठने के बाद सुमित और उनकी बहनों को मां ने कई तरह के दुखों को सहते हुए बड़ा किया।
सड़क हादसे में पैर गंवाया
पिता को खोने के बाद सुमित को एक और झटका लगा, जब वह 12वीं कक्षा में थे। सुमित एक सड़क हादसे का शिकार हो गए थे। ये हादसा उस वक़्त हुआ जब वो ट्यूशन से वापस घर लौट रहे थे। उनकी बाइक को ट्रैक्टर-ट्रॉली ने टक्कर मार दी थी। हालांकि, सुमित की जान बच गई थी, लेकिन उन्हें अपना पैर गंवाना पड़ा था।
पिता को खोने और अपने पैर गंवाने के बावजूद सुमित ने हार नहीं मानी। उन्हें दोस्तों और रिश्तेदारों का भरपूर साथ मिला। सुमित ने खेल में दिल लगाया और SAI सेंटर पहुंच गए। उन्होंने द्रोणाचार्य अवॉर्ड विजेता कोच नवल सिंह से जैवलिन थ्रो की बरीकियां सीखी।
सुमित 2018 एशियन चैंपियनशिप (Asian Championship) में देश का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे थे जहां वो पांचवें नंबर पर रहे थे। सके बाद 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप (World Championship) में सुमित ने सिल्वर मेडल जीता। फिर 2020 टोक्यो (Tokyo Paralympics) और 2024 पेरिस पैरालंपिक (Paris Paralympics) में लगातार गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रौशन किया।
मिठाइयों से किया परहेज
पैरालंपिक गेम्स से पहले तेजी से वजन बढने के जोखिम के चलते सुमित को अपनी पसंदीदा मिठाइयों से परहेज करना पड़ा। इसके अलावा पिछले साल हांगझोउ पैरा एशियाई खेलों में कमर में लगी चोट भी उन्हें परेशान कर रही थी।
फिजियोथेरापिस्ट की सलाह पर सुमित ने मिठाई खाना छोड़ दिया और कड़ी डाइटिंग पर थे। इस तरह उन्होंने दो महीने में 12 किलो वजन कम किया। पेरिस में उनकी मेहनत रंग लाई जब पैरालंपिक खिताब बरकरार रखने वाले वह दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए।


