समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election 2024) से पीछे हट गए हैं। उनका कहना है कि बीजेपी को हराने के लिए ‘इंडिया अलायंस’ को अपनी ताकत और एकजुटता दिखानी होगी।
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि ‘बात सीट की नहीं जीत की है’। उन्होंने कहा- “हरियाणा के विकास व सौहार्द की विरोधी भाजपा की नकारात्मक, साम्प्रदायिक, विभाजनकारी राजनीति को हराने में ‘इंडिया एलायंस’ की जो भी पार्टी सक्षम होगी, हम उसके साथ अपने संगठन और समर्थकों की शक्ति को जोड़ देंगे।”
लोकसभा चुनावों में यूपी में 37 सीटें जीतने वाले अखिलेश यादव अपनी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाने की रणनीति पर काम कर रहे थे। इसी के लिए वो हरियाणा विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहे थे। चुनावों में सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच बात भी चल रही थी। 17 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी हो चुकी थी। सपा के कार्यकर्ताओं ने जुलाना, सोहान, बावल, बेरी और दादरी में जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया था।
लेकिन बीते दिन (6 सितंबर) सपा प्रमुख अखिलेश यादव ‘X’ पर पोस्ट करते हैं। लिखते हैं कि ‘INDIA Alliance’ एकजुटता का नया इतिहास लिखने में सक्षम हैं। हमने कई बार कहा है और एक बार फिर दोहरा रहे हैं व आगे भी दोहरायेंगे कि ‘बात सीट की नहीं जीत की है’।
इसके साथ और भी कई बातें लिखी गई थी। लेकिन जो सबसे जरूरी बात थी, उसे अखिलेश यादव ने अंत में लिखा।
पोस्ट के अंत में अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) लिखते हैं ‘हम हरियाणा के हित के लिए बड़े दिल से, हर त्याग-परित्याग के लिए तैयार हैं।’
क्या है अखिलेश यादव के त्याग-परित्याग का मतलब ?
इस आखिरी लाइन में अखिलेश यादव ने कांग्रेस को बड़ा मैसेज दिया है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के शब्दों को पकड़ें तो समझ में आता है कि हरियाणा को छोड़ कर अखिलेश ने यूपी पर अधिकार जताने का काम किया है। उत्तर प्रदेश में उपचुनाव होने वाले हैं, थोड़ा और दूर देखें तो 2027 में यूपी विधानसभा चुनाव होने हैं।
समाजवादी पार्टी, ‘INDIA Alliance’ की अकेली पार्टी है जो उत्तर प्रदेश में बड़ा कद रखती है। यानी संदेश साफ है कि आज हमने हरियाणा छोड़ा है, कल आपको यूपी छोड़ना होगा। हम हरियाणा में सीट नहीं मांग रहे है, आपको यूपी में जितनी सीट मिले उसमें संतोष करिएगा।
अखिलेश यादव ने राजनीतिक लेन देन की बात को बड़े आसान शब्दों में कांग्रेस को समझा दिया है।
लेकिन, अहम सवाल ये है कि क्या कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व अखिलेश यादव की बात को समझेगा। क्योंकि मध्यप्रदेश चुनावों को बहुत ज्यादा समय नहीं हुआ है।
वहां, चुनावों के दौरान कांग्रेस के बड़े नेता कमलनाथ ने यहां तक बोल दिया था कि ‘कौन अखिलेश वखिलेश’, उस वक्त अखिलेश यादव काफी नाराज हुए थे। लेकिन कांग्रेस की पहली पंक्ति के नेताओं ने अपने ‘INDIA Alliance’ सहयोगी को मनाने या कमलनाथ को समझाने की कोशिश तक नहीं की थी।


