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    Kapil Parmar ने पदक जीतकर रचा इतिहास, कभी 6 महीने कोमा में रहे थे

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    भारत के पैरा एथलीट कपिल परमार (Kapil Parmar) ने जूडो में कांस्य पदक (Bronze medal) जीतकर इतिहास रच दिया है। कपिल पैरालंपिक खेलों में जूडो में मेडल जीतने वाले भारत के पहले खिलाड़ी बन गए हैं। कपिल ने पेरिस पैरालंपिक (Paris Paralympics) में पुरुषों की 60 किलोग्राम J1 स्पर्धा में ब्राजील के Elielton de Oliveira को हराकर कांस्य पदक जीता है।

    कपिल परमार (Kapil Parmar) के इस कांस्य पदक के साथ पेरिस पैरालंपिक में भारत के कुल पदकों की संख्या 25 हो गई है। भारत इस प्रतियोगिता में अब तक 5 स्वर्ण, 9 रजत और 11 कांस्य जीत चुका है। इस वक़्त भारत पदक तालिका में 16वें पायदान पर पहुँच गया है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कपिल परमार (Kapil Parmar) की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है। मोदी ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए लिखा- बेहद यादगार प्रदर्शन और खास पदक! कपिल परमार को बधाई! कपिल पैरालिंपिक में जूडो में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। पैरालिंपिक 2024 में पुरुषों की 60 किग्रा जे1 स्पर्धा में कांस्य जीतने के लिए उन्हें बधाई! उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।

    (पीएम मोदी ने कपिल परमार को दी बधाई)

    24 साल के कपिल परमार ने 2019 राष्ट्रमंडल चैंपियनशिप में स्वर्ण, 2023 ग्रैंड प्रिक्स में स्वर्ण, 2023 वर्ल्ड गेम्स में कांस्य और 2022 एशियाई पैरा खेलों में रजत पदक भी जीता है। कपिल (Kapil Parmar) की इस कामयाबी के पीछे उनके संघर्ष का लंबा इतिहास रहा है। आइए जानते हैं-

    मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव शिवोर (Shivor in Madhya Pradesh) में जन्मे कपिल परमार (Kapil Parmar) के साथ बचपन में एक बड़ा हादसा हो गया था। हुआ यूं कि एक बार कपिल अपने गांव के मैदान में खेल रहे थे, तभी उन्होंने गलती से वाटर पम्प छू दिया था। इस घटना में कपिल को बिजली का तेज झटका लगा और बेहोश हो गए थे।

    कपिल को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां वो करीब छह महीने तक कोमा में रहे।

    चार भाइयों और एक बहन में कपिल अपने माता-पिता की सबसे छोटी संतान हैं। कपिल के पिता टैक्सी चलाते हैं जबकि कपिल की बहन एक प्राइमरी स्कूल चलाती हैं।

    कपिल के एक भाई भी जूडो खेलते हैं जो अक्सर कपिल को जूडो सिखाया करते थे।

    इन सभी हालातों के बावजूद जूडो के प्रति कपिल (Kapil Parmar) का लगाव काम नहीं हुआ। वो ब्लाइन्ड जूडो में अपने हुनर को निखारने की कोशिश में जुटे रहे। उनके इस संघर्ष में उनके कोच भगवान दास और मनोज ने उनका खूब सहयोग किया।

    जूडो में अपनी प्रैक्टिस की जरूरतों को पूरा करने के लिए कपिल (Kapil Parmar) को अपने भाई ललित के साथ चाय की दुकान तक लगानी पड़ी। आज उनकी यह मेहनत रंग लाई है और उन्होंने पेरिस पैरालंपिक में दुनिया के मंच पर अपने राज्य और देश का नाम ऊंचा किया है।

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