भारत के पैरा एथलीट प्रवीण कुमार (Praveen Kumar) ने पेरिस पैरालंपिक 2024 (Paris Paralympics 2024) में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर इतिहास बना दिया है। प्रवीण ने पुरुषों की हाई जंप (High Jump) स्पर्धा T64 में गोल्ड मेडल जीता है।
प्रवीण ने इस इवेंट में 2.08 मीटर ऊंची कूद के साथ गोल्ड अपने नाम किया। अमेरिका के डेरेक लोकिडेंट (Derek Loccident) और उज्बेकिस्तान के टेमुरबेक जियाज़ोव (Temurbek Giyazov) ने क्रमशः 2.06 मीटर (पैरालंपिक रिकॉर्ड) और 2.03 मीटर (व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ) के प्रयासों के साथ कांस्य पदक जीता।
T64 स्पर्धा में वो एथलीट हिस्सा लेते हैं जिनके एक पैर के निचले हिस्से में मामूली रूप से कम मूवमेंट होता है या घुटने के नीचे एक या दोनों पैर नहीं होते।
पेरिस पैरालंपिक में भारत का यह छठा गोल्ड मेडल है। इस मेडल के साथ ही भारत के पदकों की संख्या 26 तक पहुंच गई है और मेडल टैली में भारत फिर से 14वें स्थान पर पहुंच गया है।
केन्द्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने प्रवीण कुमार को इस उपलब्धि पर बधाई दी है। मांडविया ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा- “पेरिस पैरालंपिक 2024 में पुरुषों की ऊंची कूद T64 में स्वर्ण पदक जीतने के लिए प्रवीण कुमार को बधाई! उनकी प्रेरणादायक छलांग ने एथलेटिक्स में एक नया मानक स्थापित किया है और हमारे देश को गौरव से भर दिया है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने एक बार कहा था, “हमारे एथलीटों की भावना हम सभी को प्रेरित करती है।” विजय और दृढ़ संकल्प का यह क्षण उस भावना का प्रमाण है। बहुत-बहुत बधाई, प्रवीण!”
21 साल के प्रवीण कुमार का ये प्रदर्शन एशियाई रिकॉर्ड भी बना है। प्रवीण पहले एशियाई एथलीट हैं जिसने पैरालंपिक में इतना शानदार प्रदर्शन किया।
इस तरह प्रवीण पैरालंपिक में अब तक 2 मेडल जीत चुके हैं। टोक्यो पैरालंपिक 2020 (Tokyo Paralympics) में उन्होंने सिल्वर मेडल (Silver Medal) जीता था, अब पेरिस पैरालंपिक में उन्होंने सिल्वर को गोल्ड मेडल में बदल दिया है।
प्रवीण कुमार ने कभी भी अपनी कमजोरी को अपने प्रदर्शन के सामने नहीं आने दिया। उन्होंने इसके लिए काफी मेहनत की, उन्होंने अपनी कमजोरी को ताकत में बदला और अब वो इतिहास रचने में कामयाब हुए हैं।
नोएडा के रहने वाले हैं प्रवीण
प्रवीण कुमार दिल्ली से सटे नोएडा (गोविंदगढ़) के रहने वाले हैं। जब वो पैदा हुए थे तो उनका एक पांव छोटा था। इस वजह से वो अपने दोस्तों के बीच हीनभावना से जूझते रहते थे। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने कभी अपने हौसले को पस्त नहीं होने दिया।
प्रवीण कुमार के एक पांव में परेशानी जरूर थी लेकिन खेल को लेकर उनका जुनून कमाल का था। दिलचस्प बात ये है कि प्रवीण को वॉलीबॉल में काफी दिलचस्पी थी लेकिन उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव तब हुआ जब इस खिलाड़ी ने पहली बार एक हाई जंप प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।
प्रवीण कुमार ने एक सामान्य श्रेणी के हाई जंप प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और वहां से लोगों को उनके टैलेंट के बारे में पता चला। इसके बाद पैरा एथलेटिक्स कोच डॉक्टर सत्यपाल सिंह ने प्रवीण के हुनर को निखारने में मदद की। प्रवीण कुमार ने कड़ी मेहनत के दम पर 2019 में स्विट्जरलैंड में हुए वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स जूनियर चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। 2021 में प्रवीण कुमार ने दुबई में हुई वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में गोल्ड मेडल जीता।


