योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) ने कहा है कि विनेश फोगाट को भारत को पेरिस ओलंपिक में मेडल का नुकसान कराने के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। दत्त के मुताबिक, हम सभी जानते हैं कि अगर किसी खिलाड़ी का वजन एक ग्राम भी ज्यादा होता है तो उसे डिसक्वालिफाई कर दिया जाता है।
ओलंपिक पदक विजेता और बीजेपी नेता योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) ने विनेश फोगाट की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि विनेश फोगाट को भारत को पेरिस ओलंपिक में मेडल का नुकसान कराने के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए।
योगेश्वर दत्त ने कहा कि विनेश फोगाट ने डिसक्वालीफिकेशन की जिम्मेदारी नहीं ली, बल्कि अपनी अयोग्यता के लिए दूसरों को दोषी ठहराने लगी।
आपको बता दें कि हाल ही में हुए पेरिस ओलंपिक में विनेश फोगाट 50KG कैटेगरी कुश्ती के फाइनल में डिसक्वालीफाई हो गई थीं। योगेश्वर दत्त साल 2012 में हुए लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुके हैं।
हाल ही में विनेश फोगाट ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है और हरियाणा विधानसभा चुनाव में जुलाना सीट से अपनी किस्मत आजमा रही हैं।
टीवी चैनल आज तक के एक कार्यक्रम में योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) ने कहा कि उन्हें आश्चर्य हुआ जब विनेश ने ओलंपिक डिसक्वालीफिकेशन के पीछे साजिश होने का आरोप लगाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि विनेश ने इस घटना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक को जिम्मेदार ठहरा दिया।
योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) ने आगे कहा, “हम सभी जानते हैं कि अगर किसी खिलाड़ी का वजन एक ग्राम भी ज्यादा होता है तो उसे डिसक्वालिफाई कर दिया जाता है। देश में गलत माहौल बनाया गया। देश को मेडल का नुकसान करने के बाद भी एक धारणा बनाई गई कि विनेश के साथ गलत हुआ है।”
उन्होंने कहा, “अगर विनेश की जगह मैं होता तो पूरे देश से माफी मांगता कि मैं अपना वजन कम नहीं कर पाया। लेकिन यहां तो इसका उलट हो रहा है, उनका स्वागत किया जा रहा है। प्रधानमंत्री को गाली दी जा रही है। गलती पर स्वागत की प्रथा जो हिन्दुस्तान में चली है, वह गलत है।”
योगेश्वर (Yogeshwar Dutt) की यह टिप्पणी विनेश द्वारा भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और उसकी अध्यक्ष पीटी उषा पर गंभीर आरोप लगाने के बाद आई है।
फोगाट ने संयुक्त रजत पदक के लिए कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट (CAS) में अपनी अपील के दौरान पर्याप्त कानूनी सहायता प्रदान नहीं करने के लिए IOA की आलोचना की थी। उनके प्रयासों के बावजूद भी CAS ने उनके खिलाफ फैसला सुनाया था।


